नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘राजनीतिक स्वार्थ’ के चलते आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना लागू नहीं करने को लेकर मंगलवार को दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकारों पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि इन दोनों राज्यों के बुजुर्गों को इसके विस्तारित कार्यक्रम के तहत मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पाएगा।
राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 70 वर्ष और इससे अधिक आयु के नागरिकों को भी शामिल करने की योजना की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही। इस योजना से सभी आय वर्गों के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ होंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं दिल्ली और पश्चिम बंगाल के 70 वर्ष से अधिक उम्र के हर बुजुर्ग से क्षमा मांगता हूं कि मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा। मुझे पता तो चलेगा कि आपको कष्ट है, लेकिन मैं आपकी मदद नहीं कर पाऊंगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कारण...अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकार 'आयुष्मान भारत योजना' से जुड़ नहीं रही है।’’
उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने ही राज्य के बीमार लोगों के साथ ‘जुल्म करने की प्रवृत्ति’ मानवता की दृष्टि से किसी भी तराजू पर खरी नहीं उतरती।
मोदी ने कहा कि 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा और उन्हें ‘आयुष्मान वय वंदना’ कार्ड दिया जाएगा, मगर अफसोस है कि वह अन्य राज्यों में लोगों की सेवा तो कर पाएंगे, लेकिन दिल्ली और पश्चिम बंगाल में नहीं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के लोगों की सेवा तो कर पा रहा हूं लेकिन राजनीतिक स्वार्थ की दीवारें मुझे दिल्ली और पश्चिम बंगाल के बुजुर्गों की सेवा करने से रोक रही हैं। मेरे दिल में कितना दर्द होता होगा, इसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर पाऊंगा।’’
दिल्ली में 2025 और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव होने हैं।
धन्वन्तरी जयंती और 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर लगभग 12,850 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद मोदी ने कहा कि इस साल के आम चुनावों के दौरान उन्होंने वादा किया था कि 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आज आज धनवंतरी जयंती के दिन ये गारंटी पूरी हो रही है।’’
मोदी ने कहा कि जब तक देश का गरीब और मध्यम वर्ग महंगे इलाज के बोझ से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत लगभग चार करोड़ गरीब लोगों ने लाभ उठाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह योजना नहीं होती तो उन्हें (गरीबों को) अपनी जेब से लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अक्सर आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के साथ बातचीत करता हूं और उनके अनुभव सुनता हूं...।’’
उन्होंने कहा कि अतीत में ऐसी कोई लाभकारी योजना मौजूद नहीं थी।
मोदी ने कहा कि देश भर में 14,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र संचालित हैं, जहां दवाएं 80 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि इन जनऔषधि केंद्रों के कारण गरीब और मध्यम वर्ग सस्ती दवाओं की उपलब्धता के कारण 30,000 करोड़ रुपये बचाने में कामयाब रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह, स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण जैसे उपकरणों की कीमतों में कमी की गई है, जिससे आम नागरिकों द्वारा 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की गई है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नि: शुल्क डायलिसिस योजना और मिशन इंद्रधनुष अभियान घातक बीमारियों को रोक रहे हैं और गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के जीवन को बचा रहे हैं।
मोदी ने बीमारियों से जुड़े जोखिम और असुविधाओं को कम करने के लिए समय पर निदान के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि शीघ्र निदान और उपचार की सुविधा के लिए देश भर में दो लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ये आरोग्य मंदिर करोड़ों नागरिकों को कैंसर, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों की आसानी से जांच करने में सक्षम बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि समय पर निदान से शीघ्र उपचार होता है, अंततः रोगियों के लिए लागत की बचत होती है।
प्रधानमंत्री ने समझाया कि सरकार ई-संजीवनी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाने और नागरिकों के पैसे बचाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रही है, जहां 30 करोड़ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन डॉक्टरों से परामर्श किया है।
मोदी ने यू-विन प्लेटफॉर्म की शुरुआत करते हुए कहा कि यह भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी रूप से उन्नत सुविधा प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया ने महामारी के दौरान हमारे को-विन प्लेटफॉर्म की सफलता देखी और यूपीआई भुगतान प्रणाली की सफलता एक वैश्विक कहानी बन गई है।’’
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की ओर से उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इस सफलता को दोहराना है।
ब्रजेन्द्र
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