नयी दिल्ली, एक फरवरी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि 40 वर्ष से कम उम्र के आदिवासियों को ‘सिकल सेल एनीमिया’ की स्थिति का उल्लेख करते हुए कार्ड प्रदान किए जाएंगे और यदि वे इस बीमारी से प्रभावित किसी अन्य व्यक्ति से शादी करते हैं तो उनके भावी बच्चे बच्चे को बीमारी के जोखिम के बारे में विवाह-पूर्व परामर्श दिया जाएगा।
मांडविया ने केंद्रीय बजट पेश होने के बाद कहा कि सरकार मिशन मोड में ‘सिकल सेल एनीमिया’ के उन्मूलन का काम करेगी और मामलों का शुरू में पता लगाने के लिए प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जांच करेगी।
उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोग (एससीडी) एक आनुवंशिक स्थिति है, जो भारत में आदिवासी आबादी और अन्य कमजोर आबादी में व्यापक रूप से फैली है।
मांडविया ने कहा, "सरकार बीमारी से प्रभावित 40 साल से कम उम्र के आदिवासी व्यक्तियों को स्क्रीनिंग के बाद उनकी ‘सिकल सेल एनीमिया’ की स्थिति का उल्लेख करते हुए कार्ड भी जारी करेगी और रोगी यदि दूसरे ‘सिकल सेल एनीमिया’ प्रभावित व्यक्ति से शादी करते हैं तथा बच्चे को जन्म देते हैं तो उनके बच्चे को होने वाली बीमारी के हानिकारक प्रभावों से अवगत कराने के लिए विवाह-पूर्व परामर्श भी प्रदान करेगी।"
स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी के प्रसार को कम करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनजातीय मंत्रालय और राज्यों के सहयोग से सबसे अधिक प्रभावित लोगों वाले 200 जिलों में 40 वर्ष से कम आयु के लगभग सात करोड़ लोगों की जांच के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में 2023-24 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि 2047 तक ‘सिकल सेल एनीमिया’ को खत्म करने के लिए एक मिशन शुरू किया जाएगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY