नयी दिल्ली, एक अक्टूबर सरकार जल्द ही बहुप्रतीक्षित नयी राष्ट्रीय कपड़ा नीति की घोषणा करेगी, जिसमें भारत के लिये भविष्योन्मुख रणनीति और कार्ययोजना तैयार की जायेगी। एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
कपड़ा सचिव रवि कपूर ने भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) की वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कपड़ा उद्योग की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने और इस क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिये यह किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि अगले महीने या उसके बाद हम नयी कपड़ा नीति की घोषणा कर पाएंगे। यह एक भविष्योन्मुख नीति है।’’
सचिव ने कहा कि सरकार कपड़ा नीति को वास्तविक रूप देने के अंतिम चरण में है, जो कोरोना वायरस महामारी के कारण विलंबित हो गयी है। उन्होंने कहा कि कपड़ा मंत्रालय और उद्योग जगत के बीच अंतिम दौर के परामर्श के बाद इसे जारी किया जायेगा।
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इस सप्ताह की शुरुआत में डिजिटल तरीके से आयोजित एजीएम (सालाना आम बैठक) में कपूर ने यह भी कहा कि सरकार एक फोकस प्रोडक्ट स्किम पर भी काम कर रही है, जिसमें उसने शीर्ष 40 मानव निर्मित धागे (एमएमएफ) उत्पादों के निर्यात डेटा का विश्लेषण किया है। इसमें पाया गया कि 150 अरब डॉलर के कुल वैश्विक बाजार में भारत का सिर्फ 0.7 प्रतिशत का छोटा हिस्सा है।
इसी तरह, शीर्ष-10 तकनीकी कपड़ा लाइनों में भारत का हिस्सा 100 अरब डॉलर के वैश्विक बाजार में महज 0.6 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, सरकार द्वारा किये गये एक अध्ययन से पता चला है कि 2030 तक एमएमएफ आधारित कपड़ा और परिधान उत्पादों का हिस्सा 80 प्रतिशत तक पहुंच जायेगा। उन्होंने कहा कि कपास की कीमत 20 प्रतिशत तक कम हो जायेगी क्योंकि वैश्विक मांग एमएमएफ आधारित उत्पादों की अधिक है।
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