नयी दिल्ली, 29 जुलाई केंद्र सरकार ने अपने उन कर्मचारियों के लिए नियमों में ढील दी है जो लॉकडाउन के दौरान छुट्टी पर गए थे या आधिकारिक दौरे पर थे और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं रहने के कारण कार्यालय वापस नहीं आ पाए।
जरूरी अनुमति के बाद छुट्टी पर गए, लेकिन यात्रा संबंधी पाबंदी के कारण ड्यूटी पर लौट नहीं पाने वाले कई कर्मचारियों की ओर से संदेश मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है ।
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कार्मिक मंत्रालय ने इन सवालों पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्र सरकार के सभी विभागों को एक आदेश जारी किया है । साथ ही, निर्देश दिया है कि इस विषय पर उन्हें डीओपीटी (मंत्रालय के तहत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) का ‘‘अनावश्यक रूप से संदर्भ देने से परहेज करना चाहिए।’’
इसमें कहा गया है कि जो कर्मचारी आधिकारिक दौरे पर थे और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं रहने के कारण कार्यालय नहीं आए पाए तथा उन्होंने इसकी सूचना कार्यालय को दी थी, तो ऐसी स्थिति में मान लिया जाए कि दौरा खत्म होने के अंतिम दिन वे ड्यूटी पर लौट आए।
देश में 25 मार्च से लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के पहले छुट्टी पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के मामले में भी यही प्रावधान लागू होगा ।
इसमें कहा गया है, ‘‘अगर चिकित्सा आधार पर छुट्टी ली गयी थी तो मेडिकल या फिटनेस प्रमाण पत्र पेश करना होगा।’’
ऐसे सरकारी सेवक जो लॉकडाउन के पहले 21 मार्च (शुक्रवार) को मुख्यालय से निकल गए थे और परिवहन नहीं रहने के कारण 23 मार्च को नहीं लौट पाए तो कार्यालय को सूचित कर देने की स्थिति में माना जाएगा कि वे 23 मार्च को ड्यूटी पर आए।
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