देश की खबरें | झारखंड सरकार सभी गरीब बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराये: मरांडी
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रांची, 11 जून भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने बृहस्पतिवार को झारखंड सरकार से सभी गरीब बच्चों को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराने की मांग की जिससे वर्तमान परिस्थितियों में जब राज्य के अधिकतर निजी विद्यालयों ने आनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की है, गरीब बच्चों के लिए संसाधन बाधक नहीं बने। मरांडी ने साथ ही कहा कि आने वाले समय में लंबे समय तक यही व्यवस्था लागू रहने की संभावना है।

झारखंड में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आज लिखे अपने पत्र में यह बात कही।

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उन्होंने अपने पत्र में लिखा, ‘‘मेरा सुझाव है कि राज्य सरकार द्वारा सभी गरीब बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि इस नए डिजिटल माहौल में गरीब बच्चों के लिए संसाधन बाधक नहीं बन सके।’’

उन्होंने कहा कि पढ़ाई से जुड़े विषय यूट्यूब और वीडियो के माध्यम से उसी फोन में अपलोड हों। साथ ही डेटा कंपनियों से बात करके जरूरत भर न्यूनतम डेटा भी गरीब बच्चों को उपलब्ध कराना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय के बच्चे कोरोना वायरस के चलते उत्पन्न इस स्थिति में भी समय के साथ अपडेट हैं और ऐसा नहीं हो कि संसाधनों की कमी के कारण सरकारी स्कूल के बच्चे पढ़ाई और तकनीक में काफी पीछे रह जाएं।

मरांडी ने कहा कि इसलिए सरकार द्वारा भी लॉकडाउन के दरम्यान सरकारी विद्यालयों में आनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था कराई गई। सरकार की इस आनलाइन व्यवस्था से शिक्षा से लाखों बच्चे जुड़े भी हैं। परंतु सरकारी विद्यालयों के बच्चों के पास निजी स्कूलों के बच्चों के मुकाबले सुविधा का घोर अभाव है। निजी स्कूल के अधिकांशः बच्चें सुविधा संपन्न होते हैं। वहीं सरकारी स्कूलों के बच्चों के पास इस नई तकनीक के साथ पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन सहित अन्य पर्याप्त संसाधन की कमी है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल युग में अब स्मार्टफोन पढ़ाई से लेकर जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या भी अधिक होने के कारण आनलाइन पढ़ाई हेतु बच्चों के लिए स्मार्टफोन की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘‘मुख्यमंत्री जी, परिस्थिति और बदलते जमाने के साथ राज्य के गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए संसाधन उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। आपसे, उपर्युक्त विषय के संदर्भ में तत्काल पहल की अपेक्षा है।’’

मरांडी ने लिखा है, ‘‘कोरोना के कारण फिलहाल स्कूल बंद हैं। जो स्थिति दिख रही है कि अगस्त के पहले विद्यालयों के खुलने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। विद्यालय खुल भी गए तो पूर्व की भांति सुचारू स्थिति आने में और वक्त लगने से इनकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही इस बदली परिस्थति में विद्यालय में पठन-पाठन का क्या स्वरूप होगा, यह भी कोई बताने की स्थिति में नहीं है। जब तक कोरोना की वैक्सीन बाजार में नहीं आ जाती, तब तक स्थिति सामान्य होती नहीं दिखती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि आनलाइन शिक्षा कभी आफलाइन शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकती है। परंतु इन सबके बीच यह भी तय है कि बदलते वक्त के साथ तकनीक की अपनी महत्ता है और समय के साथ इसकी उपयोगिता और बढ़ने ही वाली है। अब बच्चों की पढ़ाई का बड़ा हिस्सा तकनीक के सहारे ही निर्भर होगा। लिहाजा गरीब बच्चों को स्मार्ट फोन और डेटा कनेक्शन उपलब्ध कराना आवश्यक है।’’

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