देश की खबरें | गुजरात-कर्नाटक में प्रायोगिक परियोजना से सरकार राशन में आयुष अवयव मिलाने के कदम को परख रही

केवड़िया (गुजरात), 18 जून सरकार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों से उन्हें दिए जाने वाले राशन में ‘आयुष’ अवयव मिलाने के कदम को परख रही है । एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रयोग के आधार पर गुजरात एवं कर्नाटक में आजमायी जा रही है तथा इन दोनों ही राज्यों ने अच्छे परिणाम दिये हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के इन अधिकारी ने कहा कि यह देखने के लिए इस परियोजना के निष्कर्षों को आईसीएमआर के साथ साझा किया जाएगा कि क्या इसका (पहल का) चिकित्सकीय दृष्टि से तृतीय पक्ष सत्यापन हो सकता है।

अधिकारी ने यहां मंत्रालय की उप क्षेत्रीय बैठक में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ ऐसा हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी आयुष सचिव के साथ लगातार वार्ता हो रही है।’’

आईसीडीएस की संयुक्त निदेशक अवंतिका दर्जी ने कहा कि गुजरात में बच्चों को दिए जाने वाले बालशक्ति में त्रिकटू और विदांग तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के राशन मातृशक्ति में जीरा और मुस्ता जैसे आयुर्वेदिक अवयव मिलाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में यह प्रायोगिक परियोजना जामनगर, देवभूमि द्वारका, डांग , नर्मदा , भावनगर और दाहोद में चलायी जा रही है।

दर्जी ने कहा, ‘‘ आईसीडीए लाभार्थियों के स्वास्थ्य एवं पोषण दर्जे में सुधार के लिए गुजरात सरकार गुजरात दुग्ध विपणन सहकारी संघ और संबंधित डेयरी संघों के सहयोग से ‘सूक्ष्मपोषक समृद्ध’ राशन दे रही है। ’’

उन्होंने कहा कि यह देखा गया कि इससे (आयुष अवयवों से) बच्चों में भूख, पोषण का पाचन, वजन में वृद्धि, आंत में कृमि नियंत्रण और अपच में सुधार आता है तथा गर्भवती एवं स्तनपान करने वाली महिलाओं में जीरा से ‘नाभिनाल में आईपोक्सिक(ऑक्सीजन की कमी) की स्थिति में सुधार आता है।

सरकार कुपोषण से लड़ने के लिए छह माह से छह साल तक के बच्चों तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए राशन प्रदान कर रही है।

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