नयी दिल्ली, 30 जनवरी सरकार ने कहा है कि निजी प्रसारकों द्वारा अनिवार्य रूप से दैनिक आधार पर प्रसारित की जाने वाली 30 मिनट की लोक महत्व से जुड़ी सामग्री अन्य टेलीविजन चैनल द्वारा प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रमों में शामिल की जा सकती है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक परामर्श में यह भी कहा कि इस सामग्री का प्रसारण लगातार 30 मिनट का नहीं होना चाहिए और इसे कुछ मिनटों के अलग-अलग ‘स्लॉट’ में तैयार किया जा सकता है।
परामर्श में कहा गया, ‘‘वाणिज्यिक विरामों के बीच लोक महत्व से जुड़ी सामग्री जिस अवधि के लिए प्रसारित की जाती है, उस पर वाणिज्यिक विराम के लिए निर्धारित 12 मिनट की समय सीमा लागू नहीं होती।’’
निजी प्रसारकों को प्रसारण सेवा पोर्टल पर एक मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
पिछले साल नवंबर में मंत्रालय ने निजी टेलीविजन चैनल को नए सेवा दायित्वों के तहत राष्ट्रीय महत्व के और सामाजिक प्रासंगिकता रखने वाले आठ विषयों के तहत हर दिन 30 मिनट के लिए ये सामग्री प्रसारित करने को कहा था।
दिशानिर्देश पिछले साल 9 नवंबर को मंत्रालय द्वारा निर्धारित नए ‘अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग’ नियमों में निर्धारित किए गए थे। निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनल और उनके संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद सोमवार को नया परामर्श जारी किया गया।
सरकार ने प्रसारकों के बीच सामग्री साझा करने और एक या कई टेलीविजन चैनल पर दोबारा प्रसारण करने की भी अनुमति दी है। सरकार ने जन कल्याणकारी सामग्री के प्रसारण के उद्देश्य से प्रासंगिक वीडियो या विभिन्न स्रोतों से पाठ्य सामग्री के भंडार के रूप में एक साझा ‘ई-मंच’ तैयार करने की भी अनुमति दी है, जिसे टेलीविजन चैनल द्वारा उपयोग किया जा सकता है।
सरकार ने आधी रात से सुबह छह बजे के बीच इस सामग्री के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय महत्व और प्रासंगिक सामाजिक विषयों की सूची में जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को भी जोड़ा गया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY