नयी दिल्ली, सात अगस्त केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश में दस शिल्प व हथकरघा ग्राम विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ताकि दुनिया भर के पर्यटक उन्हें देखने जा सकें और भारतीय बुनकरों की समृद्ध विरासत को जानकर ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन दे सकें।
ईरानी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक समारोह को संबोधित करते हुए कपड़ा मंत्रालय के दृष्टिकोण को साझा किया।
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वैश्विक स्तर पर उपयोग किये जाने वाले लगभग 95 प्रतिशत हाथ से बुने कपड़े का भारत में उत्पादन किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रस्तुत किये जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार, उन बुनकरों के अनुरोध पर स्थगित किये जा रहे हैं, जो कोविड-19 द्वारा उत्पन्न मौजूदा परिस्थितियों के कारण इसे डिजिटल रूप से प्राप्त करने के बजाय सम्मान का जश्न मनाने की इच्छा रखते हैं।
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उन्होंने कहा, "देश भर में दस शिल्प व हथकरघा ग्राम विकसित करना हमारा लक्ष्य है ताकि हमारे हथकरघा उत्पाद केवल कपड़े या घर की साज-सज्जा तक ही सीमित न हों। हम चाहते हैं कि भारत और दुनिया भर के पर्यटक इन विशेष शिल्प व हथकरघा ग्राम को न सिर्फ सीखने के लिये देखें, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की हमारी पहलों में भी योगदान दें।’’
ईरानी ने बताया कि राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के छात्र डिजाइन, विपणन और अनुसंधान के मामले में देश भर के 28 बुनकर सेवा केंद्रों में से 9 को उन्नत बनाने में योगदान दे रहे हैं।
ये केंद्र दिल्ली, श्रीनगर, जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद, वाराणसी, गुवाहाटी, कांचीपुरम और भुवनेश्वर में स्थित हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में हथकरघा की समृद्ध विरासत को मजबूत करने के लिए निफ्ट के छात्रों के माध्यम से सभी बुनकर सेवा केंद्रों को उन्नत बनाया जाना सुनिश्चित करना सरकार का प्रयास है।
ईरानी ने कहा कि इस अवसर पर शुरू किया गया 'माय हैंडलूम' पोर्टल राज्य सरकार के उपक्रमों, एजेंसियों और सहकारी समितियों को बुनकरों के लिये केंद्र की योजनाओं के साथ उनकी स्थिति व लाभों के बारे में जानने में मदद करेगा।
देश के हथकरघा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, कपड़ा सचिव रवि कपूर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उपयोग किये जाने वाले 95 प्रतिशत हस्तनिर्मित कपड़े भारत में उत्पादित किये जाते हैं।
बुनकरों को उनके उत्पादों के लिये उचित पारिश्रमिक मूल्य नहीं मिलने को लेकर उन्होंने कहा कि योजनाएं यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि बिचौलियों को खत्म करके बुनकरों को सीधे बाजार से जोड़कर उन्हें बेहतर आय दिलायें।
ईरानी ने हैंडलूम मार्क योजना के लिये एक मोबाइल ऐप और वेबसाइट की भी शुरुआत की। मंत्री ने कहा कि प्रामाणिक हथकरघा उत्पादों को सामूहिक पहचान प्रदान करने के लिए हैंडलूम मार्क को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कपड़ा समिति मुंबई ने पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाने के लिये बैकएंड वेब पोर्टल के साथ मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह ऐप अंग्रेजी और 10 भारतीय ओं में है। यह देश के बुनकरों को घर में बैठे-बैठे ही हैंडलूम मार्क पंजीकरण के लिये आवेदन करने में सक्षम करेगा।
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