नयी दिल्ली, आठ अगस्त विपक्ष के कुछ नेताओं ने मंगलवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ‘राजधर्म’ वाली चर्चित टिप्पणी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और मणिपुर की हिंसा को लेकर उन पर ‘मौनव्रत’ का आरोप लगाया।
सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई ने याद दिलाया कि 2002 के सांप्रदायिक दंगों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौरा किया था।
उन्होंने कहा, "उन्हें (प्रधानमंत्री मोदी को) मणिपुर पर बोलने में लगभग 80 दिन क्यों लग गए और (वह) केवल 30 सेकंड ही बोले... मंत्री कह रहे हैं कि वे बोलेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री के शब्दों की जो ताकत होती है उसका मुकाबला कोई मंत्री या सांसद नहीं कर सकता।’’
चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक सदस्य टी.आर. बालू ने कहा कि दिवंगत वाजपेयी 'राजधर्म' के साथ खड़े थे, ...लेकिन आज महिलाओं को जब निर्वस्त्र करके घुमाया गया तो हम उनके साथ खड़े नहीं हो सके।
उन्होंने दावा किया, ‘‘पूरी दुनिया ने मणिपुर में हुई घटनाओं की निंदा की है। यूरोपीय संघ की संसद ने इस पर चर्चा की है और ब्रिटिश संसद ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी की कड़ी निंदा की है।’’
द्रमुक नेता ने कहा कि वह अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि "हम बुराई को मारना चाहते हैं"।
उनका कहना था, ‘‘ कृष्ण ने (अर्जुन से) कहा था कि तुम अपने मित्रों को नहीं, बल्कि बुराई को मार रहे हो... वही मैं कर रहा हूं। सदन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।’’
हक
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