बेंगलुरु, 24 जुलाई कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और राज्य महादेई नदी परियोजना पर आगे बढ़ेगा।
उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री शिवकुमार ने कहा कि यह कार्य कर्नाटक की भूमि पर किया जा रहा है और उन्होंने इसे आगे बढ़ाने की सरकार की मंशा की पुष्टि की।
उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री को अंतरराज्यीय संबंधों के महत्व की भी याद दिलाई और कहा कि वह इस मामले पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से मिलेंगे।
गोवा विधानसभा में मंगलवार को सावंत ने दावा किया था कि महादेई परियोजना को केंद्र सरकार मंजूरी नहीं देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि गोवा सरकार महादेई नदी के पानी को मोड़ने के उद्देश्य से की जा रही गतिविधियों के लिए कर्नाटक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेगी।
शिवकुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री ने महादेई जल मुद्दे पर बात की है। वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं; उन्हें संघीय ढांचे की जानकारी नहीं है। महादेई जल आवंटन पर पहले ही फैसला हो चुका है और निविदा आमंत्रित की जा चुकी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निविदा जारी कर दी गई है और काम शुरू होना है। केवल वन मंजूरी की आवश्यकता है और हमें नोटिस भी दिया गया है - लेकिन कहीं भी हमें यह नहीं बताया गया कि काम शुरू न करें.....। हम उच्चतम न्यायालय से अपनी अर्ज़ी वापस ले लेंगे और काम शुरू कर देंगे।"’’
शिवकुमार ने कहा, ‘‘उनका (गोवा के मुख्यमंत्री का) बयान निंदनीय है। वह हमें रोक नहीं सकते; उनके पास यह अधिकार नहीं है। मैं काम शुरू करूंगा। उन्हें इसे रोकने की कोशिश करने दीजिए -मैं भी तो जरा देखूं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्रीय मंत्रियों को ‘गुमराह’ किया जा रहा है, शिवकुमार ने कहा कि वे पूरी तरह संतुलित हैं और ‘राजनीति में शामिल नहीं होते’। उन्होंने गोवा सरकार पर ‘मुद्दे का राजनीतिकरण’ करने का आरोप भी लगाया।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भी सावंत की टिप्पणी की बुधवार को आलोचना करते हुए इसे कर्नाटक के लोगों का ‘अपमान’ बताया।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने जानना चाहा कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस गोवा के मुख्यमंत्री के राज्य विधानसभा में दिए गए बयान का ‘राजनीतिकरण’ करने की कोशिश क्यों कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह (गोवा के मुख्यमंत्री) विधानसभा में जो कुछ भी कहते हैं, उस पर प्रतिक्रिया देने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय राज्य सरकार को अपना काम करना चाहिए - कानूनी रूप से आवश्यक प्रस्तुतियां देनी चाहिए और मंज़ूरी लेनी चाहिए। केंद्र सरकार के पास सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाने की क्या आवश्यकता है? यह केंद्र पर ज़िम्मेदारी डालने और अपनी (राज्य सरकार) विफलता को छिपाने के लिए है। यह लोगों को गुमराह करने के लिए है।’’
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