देश की खबरें | बिहार में आरक्षण 50 से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने के लिए गजट अधिसूचना जारी

पटना, 21 नवंबर नीतीश कुमार सरकार ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से सहमति मिलने के बाद मंगलवार को राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में वंचित जातियों के लिए आरक्षण 50 से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने के लिए गजट अधिसूचना जारी कर दी।

अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जहां उन्होंने संबंधित विभागों को ‘व्यापक जाति सर्वेक्षण के बाद बढ़े हुए आरक्षण के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने’ का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से बैठक के बाद जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा, "राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़े हुए आरक्षण के प्रावधानों को उन लोगों के लाभ के लिए अक्षरशः लागू किया जाना चाहिए, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जाति आधारित गणना में लोगों की आर्थिक स्थिति की भी गणना करायी गयी है, जिसके आधार पर तय किया गया है कि प्रत्येक गरीब परिवार (6,000 रुपये प्रति माह से कम कमाने वाले परिवार) को दो लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि भूमिहीन परिवारों को मकान बनाने के लिए, जमीन क्रय के लिए एक लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सतत जीविकोपार्जन योजना के प्रत्येक लाभार्थी को 2 लाख रूपये तक का लाभ दिया जायेगा।

राज्य में अब तक एक करोड़ 30 लाख जीविका दीदियां स्वयं सहायता समूह से जुड़ चुकी हैं, अब एक करोड़ 50 लाख जीविका दीदियों को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। शहरों में भी अब स्वयं सहायता समूह का गठन किया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना पर टिप्पणी करते हुए, जदयू के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, “केंद्र द्वारा जाति जनगणना के लिए अपनी अनिच्छा स्पष्ट किए जाने के बाद ही बिहार सरकार ने सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब, उन्हें (केंद्र को) हमसे सबक लेना चाहिए। हम जनगणना के साथ-साथ जाति-आधारित गणना भी चाहते थे...लेकिन केंद्र सहमत नहीं था। दशकीय जनगणना, जिसे 2021 में पूरा हो जाना चाहिए था, तुरंत शुरू होनी चाहिए और केंद्र को इसके साथ-साथ राष्ट्रव्यापी जाति-आधारित गणना भी करनी चाहिए।"

राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में नए आरक्षण प्रतिशत को लागू करने का अब रास्ता साफ हो गया है।

बिहार विधानमंडल के हाल में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य के ऐतिहासिक जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण प्रदेश सरकार की ओर से पेश किये जाने के बाद दोनों विधेयकों को विधानमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई थी।

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