देश की खबरें | ज़मीनी स्तर के सियासतदां से प्रथम नागरिक बनने तक, कोविंद रविवार को राष्ट्रपति भवन को कहेंगे अलविदा

नयी दिल्ली, 21 जुलाई जमीनी स्तर के नेता से लेकर देश के शीर्ष पद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले रामनाथ कोविंद समाज में समतावाद और समग्रता के पैरोकार रहे हैं।

देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर 25 जुलाई 2017 को शपथ लेने वाले कोविंद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद रविवार को राष्ट्रपति भवन से विदाई लेंगे। उनके कार्यकाल के दौरान ही कोरोना वायरस महामारी का अप्रत्याशित दौर आया।

कोविंद ने जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष न्यायालय व संसद तक कार्य के अपने वृहद अनुभव से राष्ट्रपति कार्यालय को समृद्ध किया।

झारखंड की पूर्व राज्यपाल और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू देश की अगली राष्ट्रपति होंगी। मुर्मू ने विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति चुनाव में पराजित किया है। मुर्मू आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति हैं।

कोविंद सामाजिक सशक्तिकरण के लिए एक उपकरण के रूप में शिक्षा का इस्तेमाल करने के हिमायती रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बड़ी भागीदारी का भी सक्रियता से समर्थन किया है और लगातार आह्वान किया कि समाज के कमजोर तबकों, खासकर, दिव्यांग एवं अनाथों के लिए अधिक मौके सृजित करे।

राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद कोविंद के भाषण में देश के विकास के प्रति उनकी दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता की झलक मिली थी।

तब अपने संबोधन में कोविंद ने अपनी साधारण पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा था कि वह एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पले-बढ़े और राष्ट्रपति पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा एक लंबा सफर है।

कोविंद ने तब कहा था कि भारत की कामयाबी की कुंजी उसकी विविधता है।

उन्होंने 25 जुलाई 2017 को कहा था, “ हमारी विविधता ही वह मूल है जो हमें इतना विशिष्ट बनाती है। इस भूमि में हम राज्यों और क्षेत्रों, धर्मों, ओं, संस्कृतियों, जीवन शैली और बहुत कुछ का मिश्रण पाते हैं। हम इतने अलग हैं और फिर भी इतने समान और एकजुट हैं।”

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