कोच्चि, आठ अक्टूबर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय को बताया कि राज्य सरकार की ‘लाइफ मिशन’ आवास परियोजना में विदेशी योगदान की आड़ में धोखाधड़ी की गई है।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि योजना के लिए दुबई स्थित रेड क्रिसेंट कंपनी के साथ हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर ने ‘बलपूर्वक हथिया’ लिया।
सीबीआई ने लाइफ मिशन पर प्राथमिकी दर्ज की थी और इसे खारिज करने के लिए याचिका दायर की गई थी।
याचिका पर सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बेघर लोगों को आवास देने के उद्देश्य से लाई गई परियोजना के क्रियान्वयन में विदेशी योगदान (विनियम) अधिनियम का उल्लंघन किया गया है और इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।
लाइफ मिशन और सीबीआई के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत ने एक अक्टूबर को सीबीआई की प्रारंभिक जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और लाइफ मिशन से जांच में सहयोग करने को कहा था।
शुक्रवार को सीबीआई ने कहा था कि गरीबों के लिए आवास बनाने के लिए केरल सरकार और दुबई स्थित रेड क्रिसेंट कंपनी के बीच जिस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ था उसे तत्कालीन प्रधान सचिव शिवशंकर ने तस्करों और एक निर्माण कंपनी के अधिकारी के साथ मिलकर हथिया लिया था।
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