उन्होंने बताया कि चारों आरोपियों ने इस महीने की शुरुआत में खुद को माओवादी बताकर व्यापारी को फोन किया तथा अपने संगठन के लिए पैसे की मांग की।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने व्यापारी को यह भी धमकी दी कि यदि वह मांग पूरी करने में असफल रहा तथा मामले की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई तो ‘कंगारू’ अदालत में उस पर मुकदमा चलाया जाएगा। आरोपियों ने व्यापारी को जान से मारने की भी धमकी दी।
‘कंगारू’ अदालत लोगों के एक समूह द्वारा किसी एक व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के लिए बनायी गयी अवैध अदालत होती है।
रायगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक विवेकानन्द शर्मा ने कहा, ''व्यापारी को लगातार धमकी भरे फोन कॉल आ रहे थे तथा उसके घर जबरन वसूली का पत्र भेजा गया, इसलिए उसने दोरागुडा थाने में शिकायत दर्ज कराई।”
उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया और कॉल करने वालों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
अधीक्षक ने कहा, "पूछताछ के दौरान पता चला कि वे किसी भी माओवादी संगठन से संबंधित नहीं थे। उन्होंने खुद को माओवादी बताया था क्योंकि लोग अक्सर माओवादियों के खिलाफ पुलिस से शिकायत नहीं करते हैं।"
आरोपियों में से दो कालाहांडी जिले के निवासी हैं, जबकि दो अन्य रायगढ़ा और झारसुगुड़ा जिलों के हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें तथाकथित माओवादियों का फोन कॉल आए तो वे घबराएं नहीं। उसने ऐसे मामले में लोगों को नजदीकी थाने से संपर्क करने तथा शिकायत दर्ज करने की सलाह दी है।
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