नयी दिल्ली, 31 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) के पूर्व प्रमुख जफरुल इस्लाम खान को राजद्रोह के एक मामले में शुक्रवार को अग्रिम जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई करते हुए 72 वर्षीय खान को राहत दी और उनसे जरूरत पड़ने पर जांच में शामिल होने को कहा।
आयोग में खान का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है।
न्यामूर्ति ने आदेश सुनाते हुए कहा, “याचिकाकर्ता (खान) को गिरफ्तारी की सूरत में 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का जमानती देने की शर्त पर अग्रिम जमानत दी जाती है।”
खान की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि खान ने पहले ही अपना लैपटॉप पुलिस को सौंप दिया है और कई बार वह जांच में शामिल हुए हैं।
अभियोजक एम पी सिंह ने कहा कि उन्हें पुलिस से निर्देश प्राप्त हुए हैं कि खान की आगे की जांच के लिए जरूरत नहीं है।
अदालत खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उनकी उम्र, स्वास्थ्य जोखिमों और कोरोना संक्रमण के खतरे का हवाला देते हुए राजद्रोह के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया गया।
अदालत ने इससे पहले उन्हें 31 जुलाई तक अंतरिम जमानत दी थी और पुलिस से इस दौरान कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा था।
खान ने, 28 अप्रैल को सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक पेज से एक पोस्ट डाली थी, जिसमें कथित तौर पर राजद्रोही एवं घृणास्पद टिप्पणियां थी।
दो मई को, एक शिकायत के आधार पर, दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने खान के खिलाफ राजद्रोह और विभिन्न समूहों के बीच धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास और के आधार पर घृणा भाव फैलाने के कथित अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
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