मुंबई,11 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने दिव्यांग जनों से जुड़ी नीतियों के लिए राज्य सलाहकार बोर्ड को एक महीने के भीतर कामकाजी बनाने का निर्देश बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार को दिया।
अदालत ने कहा, ‘‘भगवान के लिए इसे इस समयवधि में (क्रियाशील) कर दीजिए।’’
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने कहा कि यह चिंताजनक है कि राज्य सरकार को अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए अदालत के निर्देशों की आवश्यकता है।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को कानूनों, विशेषकर सुधारात्मक कानूनों को लागू करने के लिए अदालत के आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।
सरकार ने 2018 में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत बोर्ड का गठन किया था, लेकिन यह 2020 से कामकाज नहीं कर रहा है क्योंकि गैर-आधिकारिक सदस्यों के पद रिक्त हैं।
उच्च न्यायालय की पीठ ने बुधवार को सरकार से कहा कि वह एक समय सीमा बताए कि कब तक रिक्तियां भरी जाएंगी और बोर्ड कब से कामकाज प्रारंभ करेगा।
अतिरिक्त सरकारी वकील अभय आटकी ने बृहस्पतिवार को कहा कि बोर्ड 15 दिनों में कामकाज प्रारंभ कर देगा।
इस पर उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हम आपको 15 दिन से कुछ अधिक समय देंगे। भगवान के लिए तब तक यह कर दीजिए। हम निर्देश देते हैं कि सलाहकार बोर्ड का गठन किया जाए और आज से एक महीने के भीतर उसे क्रियाशील बनाया जाए।’’
न्यायालय मुंबई में फुटपाथों पर लगाए गए बोलार्ड (छोटे खंभे) के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिससे दिव्यांगों के लिए फुटपाथों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
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