जरुरी जानकारी | फिच ने भारत में गैस खपत में वृद्धि के अनुमान को घटाकर पांच प्रतिशत किया

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल फिच रेटिंग्स ने भारत में चालू वित्त वर्ष के दौरान गैस खपत में वृद्धि के अपने अनुमान को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि घरेलू गैस कीमतों में तेजी और उच्च एलएनजी दरों के चलते पर्यावरण के अनूकूल ईंधन को अपनाने की गति धीमी होगी।

सरकार ने एक अप्रैल से छह महीने की अवधि के लिए घरेलू क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस की कीमतों को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 6.1 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर दिया है। इसके बाद सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में वृद्धि हुई है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि भारत में प्राकृतिक गैस की खपत वित्त वर्ष 2022-23 में पांच प्रतिशत की दर से बढ़ेगी (वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 6.5 प्रतिशत का अनुमान), जो सात प्रतिशत वृद्धि के हमारे पिछले अनुमान से कम है।’’

फिच ने कहा कि हाल में घरेलू गैस की कीमतों में तेज वृद्धि और एलएनजी की उच्च कीमतों के चलते प्राकृतिक गैस को अपनाने की गति धीमी होगी।

देश में इस समय कुल खपत का लगभग आधा हिस्सा घरेलू गैस उत्पादन से पूरा होता है, जबकि बाकी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के रूप में आयात किया जाता है।

फिच ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड की प्राकृतिक गैस विपणन खंड से आय बढ़ने की संभावना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका से दीर्घकालिक अनुबंधित एलएनजी की तुलना में हाजिर एलएनजी की कीमतों में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘लेकिन एलएनजी की लगातार ऊंची कीमतें भारत में गैस की खपत की वृद्धि को धीमा कर देंगी।’’

फिच ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के ईंधन खुदरा विक्रेताओं आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को जनवरी-मार्च 2022 तिमाही में विपणन घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हालांकि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और भंडारण लाभ से निकट भविष्य में नुकसान कम हो सकता है।

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