नयी दिल्ली, 31 जनवरी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट को अंतिम रूप दिया। उम्मीद है कि इसमें मध्यम वर्ग की कर कटौती की आकांक्षा और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अर्थव्यवस्था की जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा।
सीतारमण एक फरवरी को रिकॉर्ड आठवां लगातार बजट पेश करेंगी। बजट के राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण होने के साथ-साथ इसमें कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने तथा उच्च कीमतों और स्थिर वेतनवृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग पर बोझ कम करने के उपाय शामिल होने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज नयी दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय में केंद्रीय बजट 2025-26 को अंतिम रूप देते हुए बजट निर्माण प्रक्रिया में शामिल सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की।
बैठक में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने भी हिस्सा लिया।
यह बजट ऐसे समय में आएगा जब चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
वित्त मंत्री द्वारा दोनों सदनों में पेश आर्थिक समीक्षा 2024-25 में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3-6.8 प्रतिशत रहेगी, जो विकसित राष्ट्र बनने के लिए आवश्यक वृद्धि दर से काफी कम है। आर्थिक समीक्षा में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भूमि और श्रम जैसे क्षेत्रों में विनियमन और सुधारों की आवश्यकता बताई गई है।
इसने संकेत दिया कि भारत की विश्वस्तरीय वृद्धि धीमी पड़ रही है तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जरूरी आठ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने के लिए अभी और काम करने की आवश्यकता है।
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