देश की खबरें | फिल्म निदेशक यौन उत्पीड़न मामले में दोषमुक्त, अदालत ने प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी का हवाला दिया

मुंबई, 24 दिसंबर मुंबई की अदालत ने फिल्म निदेशक सुभाष कपूर को वर्ष 2014 के एक यौन उत्पीड़न मामले में दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ शिकायत करने में एक 'परिपक्व और शिक्षित' महिला की ओर से चुप्पी बरती गई और प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब से घटना की सत्यता के बारे में संदेह उत्पन्न होता है।

इस मामले में वर्ष 2014 में पेशे से पत्रकार और शिकायतकर्ता महिला की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। महिला ने दावा किया था कि मई 2012 में निदेशक ने उसके घर में उसके साथ दुर्व्यवहार किया था।

कपूर को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (अंधेरी) ए.आई.शेख ने 12 दिसंबर को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन विस्तृत आदेश शनिवार को उपलब्ध कराया गया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने घटना के समय कोई आपत्ति नहीं जताई, जबकि वह बचाव के लिए शोर मचा सकती थी। अदालत ने कहा कि अभियोजक यह भी स्पष्ट करने में नाकाम रहा कि क्यों उसने, उसके रिश्तेदारों और दोस्तों ने आरोपी के खिलाफ कदम उठाने से खुद को अलग रखा।

शिकायत के मुताबिक आरोपी और उसके कुछ अन्य दोस्त मई 2012 में उसके घर रात का खाना खाने और पीने के बाद आए थे। शिकायत के मुताबिक समूह के ज्यादातर लोग रात ढाई बजे तक चले गये, लेकिन आरोपी बेडरूम में चला गया और वह कुछ देर तक नहीं लौटा।

दर्ज शिकायत के मुताबिक पता करने के लिए भेजे गए एक दोस्त ने आकर कहा कि आरोपी ठीक स्थिति में नहीं है और फिर यह दोस्त भी चला गया, लेकिन इसके बाद आरोपी कमरे से निकला और उसने शिकायतकर्ता से दुर्व्यवहार किया।

लेकिन अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने में की गई दो साल की देरी को लेकर कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।

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