देश की खबरें | विशेषज्ञों ने नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन के संरक्षण के तरीकों पर चर्चा की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 26 अगस्त भारत, बांग्लादेश, नेपाल और म्यामां के विशेषज्ञों ने नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिनों के संरक्षण के तरीकों पर मंगलवार को चर्चा की।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने यह जानकारी दी।

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‘नदियों के पारिस्थितिक तंत्र की स्थिति और इसमें रहने वाली डॉल्फिन की संख्या पर कोविड-19 के प्रभाव की खोज: भारत-बांग्लादेश-म्यामां-नेपाल में इनके संरक्षण के लिए वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति’ नामक विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने डॉल्फिन संरक्षण पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए गंगा के कायाकल्प में इसके महत्त्व पर प्रकाश डाला।

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उन्होंने डॉल्फिन के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सामुदायिक भागीदारी को आवश्यक बताया।

इसका आयोजन एनएमसीजी, इनलैंड फिशरीज सोसाइटी ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च-सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, प्रोफेशनल फिशरीज ग्रेजुएट्स फोरम और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य एवं प्रबंधन समिति द्वारा किया गया था।

भारत में, डॉल्फिन गंगा नदी के बिजनौर बैराज और इसकी सहायक नदियों रामगंगा, यमुना, गोमती, घग्घर, राप्ती, सोन, गंडक, कोसी और ब्रह्मपुत्र नदी में पाई जाती है।

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