देश की खबरें | पूरी सिल्वर लाइन परियोजना को बिगाड़ दिया गया: रेलवे के पूर्व अधिकारी का दावा

तिरुवनंतपुरम, 20 अप्रैल केरल सरकार के आलोचनाओं को दरकिनार कर अपनी महत्वाकांक्षी ‘सिल्वर लाइन रेल परियोजना’ को लेकर आगे बढ़ने के बीच भारतीय रेलवे के एक पूर्व अधिकारी ने बुधवार को दावा किया कि राज्य के लोगों पर इस परियोजना का बोझ पड़ेगा, जिस पर लगभग दो लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

सिल्वर लाइन रेल परियोजना (के-रेल) की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने वाले आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का मूल प्रस्ताव ‘ब्रॉड गेज’ लाइन के लिए था और मानक (स्टेंडर्ड) गेज अपनाने का निर्णय केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (केआरडीसीएल) द्वारा लिया गया था।

वर्मा ने कहा कि 2017 में केंद्र को भेजा गया परियोजना का मसौदा ‘ब्रॉड गेज’ लाइन को लेकर था और इसी के लिए अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि मानक गेज लाइन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मानक गेज लाइन का फैसला केआरडीसीएल ने लिया और यही मुख्य कारण है कि केंद्र सरकार इस परियोजना की लागत समेत किसी तरह की अन्य जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहती। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि परियोजना लागत का अधिकतर खर्च, यह शत प्रतिशत भी हो सकता है, केरल सरकार को उठाना पड़ेगा।

वर्मा यहां इस परियोजना से जुड़ी चिंताओं को लेकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने आये थे। हालांकि बताया जा रहा है कि वर्मा को मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद वर्मा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीसन से मुलाकात करके परियोजना पर चर्चा की।

केआरडीसीएल के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि वर्मा का रेल कॉरिडोर परियोजना के साथ केवल तीन महीने का जुड़ाव था, सेवानिवृत्त अधिकारी ने आरोप लगाया कि एजेंसी झूठ बोलने के अलावा कुछ नहीं जानती है और ‘‘उन्होंने पूरी परियोजना को खराब कर दिया है।’’

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