साथ ही लंबे समय से चला आ रहा दक्षिण चीन सागर संघर्ष भी इस शिखर सम्मेलन में चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा।
क्षेत्रीय यात्रा प्रतिबंधों एवं स्वास्थ्य जोखिमों के चलते ‘दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन’ (आसियान) के नेताओं ने डिजिटल सम्मेलन के जरिए संपर्क किया।
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आसियान के वर्तमान अध्यक्ष, वियतनाम ने आमने-सामने की बैठकों की योजना बनाई थी लेकिन अधिकतर सदस्य राष्ट्रों ने पाया कि नेताओं के लिए यात्रा करना अब भी जोखिम से भरा हुआ है। हालांकि, हनोई में करीब 200 वियतनामी अधिकारी और विदेशी राजनयिकों के साथ ही इसने पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ एक रंगारंग उद्घाटन समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को राष्ट्र प्रमुखों ने दूर बैठकर अपनी स्क्रीन पर देखा।
वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने कहा, '' कोविड-19 महामारी आसियान के लिए एक तरह की परीक्षा है।''
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उन्होंने कहा कि यह प्रकोप राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक वातावरण में निष्क्रिय चुनौतियों की आग को भड़का रहा है और प्रमुख ताकतों के बीच टकराव बढ़ाने का कारण बन रहा है।
वैश्विक महामारी ने दक्षिणपूर्वी एशियाई राष्ट्रों को अलग-अलग स्तर पर प्रभावित किया है जहां सबसे अधिक प्रभावित इंडोनेशिया में 2,600 लोगों की मौत के साथ 50,000 लोग संक्रमित हुए और छोटे से समाजवादी देश लाओस में महज 19 मामले सामने आए।
बहरहाल, 6.5 करोड़ की आबादी वाला यह विविधतापूर्ण क्षेत्र एशिया में कोविड-19 का हॉटस्पॉट रहा जहां कुल मिलाकर 1,38,000 से अधिक मामले सामने आए थे जिसने प्रकोप की शुरुआत में संक्रमण के लिहाज से चीन को भी पीछे छोड़ दिया था।
कोविड-19 का आर्थिक प्रभाव भी गंभीर रहा है। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया समेत आसियान की अग्रणी अर्थव्यस्थाएं दशकों की सबसे बुरी आर्थिक मंदी का सामना कर रही हैं।
वियतनाम ने शुक्रवार की शिखर वार्ता के बाद आसियान राष्ट्रों की तरफ से शुक्रवार को जारी की जाने वाली मसौदा विज्ञप्ति में कहा, “हम क्षेत्र में और विश्व पर कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण आई अभूतपूर्व चुनौतियों एवं इसकी कीमत को पहचानते हैं।”
इसमें कहा गया, “हम मानवीय और सामाजिक आर्थिक स्थिति पर कोविड-19 के कारण उत्पन्न चुनौतियों एवं कीमतों को समझते हैं और उन लक्षित नीतियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो यह विश्वास जगाए कि आसियान इस नाजुक संघर्ष से अग्रिम मोर्चे पर लोहा लेने के लिए तैयार है।”
उच्च प्रथामिकता वाली परियोजना के तहत आसियान कोविड-19 प्रतिक्रिया कोष स्थापित किया जाएगा जिसका प्रयोग चिकित्सीय आपूर्ति एवं सुरक्षात्मक उपकरणों की खरीद में सदस्य राष्ट्रों की मदद में किया जाएगा।
इस बीच, आसियान ने एकजुटता प्रदर्शित करने का भी प्रयास किया जोकि लंबे समय से जारी प्रतिद्वंदिता और विवादों से घिरा हुआ है, खासतौर पर दक्षिण चीन सागर में जहां इसके चार सदस्य वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया और ब्रुनेई दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक पर चीन के दावे के विरोध में हैं।
बीजिंग और वाशिंगटन के प्रभाव के कारण भी इस क्षेत्र में तनातनी जारी है।
वायरस प्रकोप से जूझ रहे देशों ने महामारी के बीच भी जल विवाद क्षेत्र में चीन के आक्रामक कदमों को लेकर निशाना साधा।
अप्रैल में भी वियतनाम ने उस समय विरोध जताया था जब चीन के जहाजों ने पारासेल द्वीपसमूह में आठ मछुआरों वाली एक नाव को डूबो दिया था। सागर में चीन की ओर से घोषित नए सीमाओं क्षेत्रों के विरोध में फिलीपीन भी वियतनाम के साथ खड़ा हुआ था।
उधर, वाशिंगटन ने भी चीन पर हमलावर होते हुए आरोप लगाया था कि महामारी के दौरान भी वह दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में विस्तार कर रहा है। हालांकि, चीन ने आरोपों को खारिज किया था।
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