नयी दिल्ली, 19 फरवरी मूडीज रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि बिजली क्षेत्र को 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले 10 साल में 700 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि बिजली क्षेत्र देश में लगभग 37 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है और इस मामले में क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 से 2050-51 के दौरान बिजली क्षेत्र को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 1.5 प्रतिशत से दो प्रतिशत (अगले 10 वर्षों के लिए लगभग दो प्रतिशत) निवेश की जरूरत है और यह संभव है।
यह क्षेत्र वर्तमान में कोयले से होने वाले उत्पादन पर अत्यधिक निर्भर है। क्षेत्र को अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों को पूरा करने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने को लेकर निवेश करना होगा।
इसमें कहा गया, ‘‘हमें अगले 10 साल में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है। इसका मतलब है कि उस अवधि में भारत की कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा। यह कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य के लिहाज से बाधा है।’’
मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2034-35 तक बिजली क्षेत्र के लिए सालाना निवेश आवश्यकता 4.5 लाख करोड़ रुपये से 6.4 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। जबकि वित्त वर्ष 2026-51 में यह लगभग छह लाख करोड़ रुपये से नौ लाख करोड़ रुपये सालाना के बीच रहने का अनुमान है।
बिजली क्षेत्र के निवेश में बिजली उत्पादन (नवीकरणीय ऊर्जा, कोयला और परमाणु ऊर्जा सहित) बिजली पारेषण और वितरण और ऊर्जा भंडारण के लिए पूंजीगत व्यय शामिल है।
इसमें कहा गया, ‘‘सालाना, यह अगले 10 वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-51 में जीडीपी का डेढ़ से दो प्रतिशत बैठता है।’’
मूडीज के अनुसार, ‘‘ये निवेश महत्वपूर्ण हैं। इसका वित्तपोषण सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों तथा विदेशी और घरेलू पूंजी द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।’’
रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले 10 साल में लगभग 6.5 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ेगी। इसमें बिजली की मांग में संचयी आधार पर वार्षिक वृद्धि दर लगभग छह प्रतिशत होगी।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2021-22 में 1,255 किलोवाट घंटा थी जो वैश्विक औसत का एक-तिहाई है। आर्थिक वृद्धि तथा जीवन स्तर में सुधार के साथ इसमें वृद्धि की संभावना है।
मूडीज ने कहा, ‘‘इस अवधि में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में लगभग 450 गीगावाट की वृद्धि का हमारा अनुमान ऐसी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होगा। इसका मतलब है कि भारत की कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता अगले 10 साल में 35 प्रतिशत (218 गीगावाट से लगभग 295 गीगावाट) तक बढ़ेगी।’’
शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में निवेश पर ध्यान देने की जरूरत होगी। अगले 20-25 वर्षों में नई पीढ़ी की क्षमता वृद्धि में सौर और पवन ऊर्जा का दबदबा रहेगा, जबकि परमाणु और जलविद्युत क्षमता में वृद्धि कम होगी।
मूडीज ने कहा कि इस बदलाव के लिए वित्तपोषण को लेकर निजी क्षेत्र और विदेशी पूंजी जरूरी है। उसे उम्मीद है कि निजी क्षेत्र भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बहुत सक्रिय रहेगा, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी अपनी भूमिका बढ़ाएंगी।
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