नयी दिल्ली, 22 मई कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस दिया जाना इस बात का उदाहरण है कि यह संवैधानिक संस्था अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है तथा सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति अनुचित ढंग से सम्मान दिखा रही है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों की तुलना किसी भी तरह से कांग्रेस के नेताओं के बयानों से नहीं की जा सकती।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ एक बार फिर से चुनाव आयोग ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही नोटिस भेज कर अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वहन का दिखावा करने की कोशिश की है। यह इस बात का एक और उदाहरण हैं कि कैसे एक संवैधानिक संस्था अपनी ज़िम्मेदारियों से बच रही है और इस समय सत्ता में बैठी पार्टी के प्रति अनुचित ढंग से सम्मान दिखा रही है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘निवर्तमान प्रधानमंत्री और उनके वरिष्ठ सहयोगी जैसे निवर्तमान गृह मंत्री शाह जिस तरह बेशर्मी भरे बयान दे रहे हैं, उनकी तुलना किसी भी तरह से कांग्रेस के नेताओं के बयानों से नहीं की जा सकती है, जिनके ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज़ की गई हैं। ’’
रमेश का कहना है कि समान अवसर का मतलब फर्ज़ी ढंग से एक के साथ-साथ दूसरे को भी बिना किसी कारण के दोषी ठहराना नहीं हो सकता।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘‘निवर्तमान’’ प्रधानमंत्री के बयान विशेष रूप से चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता और राजनीतिक प्रचार में धर्म के दुरुपयोग पर उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का घोर उल्लंघन हैं।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के आरक्षण के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए अभियान चला रही है। आखिर इसे जातिवादी कैसे कहा जा सकता है?’’
निर्वाचन आयोग ने बुधवार को सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें लोकसभा चुनाव में जाति, समुदाय, और धर्म के आधार पर प्रचार करने से बचने की नसीहत दी और कहा कि चुनावों में देश के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी सकती।
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