देश की खबरें | पर्यावरण सरंक्षण कानून के खिलाफ और भारत के भविष्य से समझौता है ईआईए का मसौदा : कांग्रेस
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 अगस्त कांग्रेस ने ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ (ईआईए)-2020 के मसौदे को पर्यावरण संरक्षण कानून के खिलाफ करार देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि सरकार भारत के भविष्य से समझौता करने एवं उसे जोखिम में डालने पर तुली हुई है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह दावा भी किया कि यह ईआईए का मसौदा भारत के पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा, पर्यावरण, लाखों गरीब आदिवासी एवं वंचित वर्ग के लोगों तथा भविष्य की पीढ़ियों के कल्याण पर सीधा हमला है।

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गौरतलब है कि पर्यावरण मंत्रालय ने इस साल मार्च में ईआईए के मसौदे को लेकर अधिसूचना जारी की थी और इस पर जनता से सुझाव मांगे गए थे। इसके तहत अलग-अलग परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी देने के मामले आते हैं।

सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ ईआईए-2020 का मसौदा भारत के पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा, पर्यावरण, जीव जंतुओं एवं वनस्पति, लाखों गरीब आदिवासी एवं वंचित वर्ग के लोग तथा भविष्य की पीढ़ियों के कल्याण पर सीधा हमला है। ‘‘सूट-बूट की सरकार’’ ने ‘‘पर्यावरण से ज्यादा महत्व पैसे को’’, ‘‘पारदर्शिता से ज्यादा महत्व मुनाफाखोरी को’’ एवं ‘‘संरक्षण से ज्यादा महत्व लाभ कमाने’’ को दिया है। ’’

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उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दूरदर्शिता से विहीन मोदी सरकार, अपने पूंजीपति मित्रों को आगे बढ़ाने की लालसा में अंधी होकर भारत के भविष्य के साथ समझौता करने और उसे जोखिम में डालने पर तुली है।’’

सुरजेवाला के मुताबिक, ईआईए 2020 के खिलाफ आपत्तियां देने की अवधि आज समाप्त हुई। सर्वाधिक तीखी आपत्तियां पर्यावरणविदों, सिविल सोसायटी समूहों, कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों की ओर से आईं हैं।

उन्होंने दावा किया कि ईआईए 2020 पर्यावरण की क्षति को वैधता व लाइसेंस के अधीन लाता है। इसके मसौदे में पर्यावरण को प्रदूषित किए जाने पर परियोजनाओं के मालिकों के लिए मुआवजे का भुगतान करने का प्रावधान है और वो अपना काम पहले की तरह जारी रख सकते हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘इस मसौदे में ‘‘जन परामर्श एवं जन बुद्धिमत्ता’’ को बाधक मान उसे केवल औपचारिकता बना दिया गया है। अजीब बात है कि ईआईए रिपोर्ट अब केवल ‘अंग्रेजी’ में देनी होगी, न कि किसी भी ‘स्थानीय/क्षेत्रीय ’ में। इसके प्रभाव को स्थानीय समुदाय के लिए समझना असंभव हो जाएगा।’’

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