पटना, 25 जुलाई बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के लिये आवंटित 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का उपयोग नहीं किए जाने पर निराशा व्यक्त की है। एक अधिकारी ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है ।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस), के के पाठक ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को एक संदेश भेजकर इस संबंध में चिंता जतायी है ।
जिलाधिकारियों को यह बताया गया है कि प्राथमिक विद्यालयों के लिए 261 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब भी अप्रयुक्त है, हालांकि इस राशि का उपयोग छात्रवृत्ति प्रदान करने और वर्दी की आपूर्ति के लिए किया जा सकता है।
पाठक ने 24 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को दैनिक आधार पर शाम को अपने अधिकार क्षेत्र के प्रधानाध्यापकों की आनलाइन बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।”
इसमें कहा गया है कि इन बैठकों में प्रधानाध्यापकों द्वारा अपने-अपने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के लिए पाठ्येतर गतिविधियों और अन्य उपायों में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर दैनिक आधार पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इसके मुताबिक सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि वे डीईओ के साथ समन्वय कर एक कार्य योजना तैयार करें ताकि प्रधानाध्यापकों के साथ आनलाइन बैठक तुरंत शुरू की जा सके । राज्य में कुल 75,000 सरकारी स्कूल हैं।
पत्र में कहा गया है, ‘‘यह पता चला कि माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों द्वारा 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अप्रयुक्त पड़ी है, जिनमें से कई स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा, शौचालय और प्रकाश बल्ब जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इन निधियों का उपयोग प्रधानाध्यापकों द्वारा किया जाना था, लेकिन वे कुछ बाध्यताओं के कारण इसका उपयोग करने में विफल रहे।"
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