नयी दिल्ली, 24 अप्रैल देश में आयातित सस्ते खाद्य तेलों की भरमार के कारण सोमवार को स्थानीय मंडियों में तेल-तिलहनों में गिरावट का रुख रहा और सोयाबीन तेल-तिलहन, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दूसरी ओर भाव ऊंचा बोले जाने मगर लिवाल नहीं होने की स्थिति के कारण सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि दिल्ली की नजफगढ़ मंडी में किसानों ने तीन दिन से सरसों रखा था, लेकिन यह बिका नहीं था, क्योंकि दाम कम बोले जा रहे थे। इन फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम लगाये जाने से दुखी होकर वे अपनी फसल बेच नहीं रहे थे। उनकी फसल खुले में पड़ी हुई थी। दाम में कोई सुधार नहीं होता देख किसान वापस अपनी ट्रॉलियों में सरसों की लदान करने लगे तब आढ़तियों ने दाम में मामूली लगभग 100 रुपये की वृद्धि करते हुए इस आवक को लगभग 4,800 रुपये क्विंटल के भाव खरीदा। उल्लेखनीय है कि सरसों का न्यूनमत समर्थन मूल्य 5,450 रुपये क्विंटल है।
सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय तेल उद्योग व्यापार संघ के अध्यक्ष सुरेश नागपाल ने कहा है कि वह 13 मार्च से सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि आयातित खाद्य तेलों पर शुल्क बढ़ाये नहीं गए, तो परेशानी बढ़ सकती है और इसकी वजह से किसान हतोत्साहित होकर दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में पैदा होने वाले किसी अन्य तिलहन फसलों के मुकाबले सबसे अधिक यानी 40 प्रतिशत तेल की प्राप्ति सरसों से ही होती है। लेकिन आयातित सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की भरमार की वजह से सरसों खप नहीं रहा और लगभग 50 प्रतिशत मिलों ने काम करना बंद कर दिया है।
सूत्रों ने कहा कि इस बात पर सरकार को गौर करना होगा कि सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पर 5.5 प्रतिशत का आयात शुल्क है जबकि पामोलीन पर 13.75 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जाता है। पामोलीन के महंगा होने के कारण इसके आयात का ऑर्डर रद्द कर आयातक नरम तेलों का आयात करने में जुट गये हैं। इस स्थिति को देखते हुए अनुमान है कि इस महीने सीपीओ और पामोलीन आयात घटकर 5.5 लाख टन रह सकता है। अब कम आयवर्ग के उपभोक्ता क्या करें ? क्योंकि थोक भाव सस्ता होने के बावजूद प्रीमियम लगाये जाने और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के कारण सूरजमुखी और सोयाबीन उन्हें सस्ते में नहीं मिल रहा और पामोलीन 13.75 प्रतिशत का आयात शुल्क के कारण महंगा हो चला है। मौजूदा विसंगति को दूर करने के लिए या तो सरकार को सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिये या पामोलीन पर आयात शुल्क कम करना चाहिये ताकि संतुलन की स्थिति बने।
सूत्रों ने कहा कि कांडला बंदरगाह पर आयातित सूरजमुखी और सोयाबीन रिफाइंड तेल 85 रुपये लीटर पड़ता है जबकि आयातित पामोलीन का भाव 90 रुपये लीटर बैठता है। इस कारण सॉफ्ट आयल का आयात बढ़ रहा है। उधर, ब्राजील में इस बार सोयाबीन की रिकॉर्ड फसल है। देश के खपने के रास्ते में रैपसीड और सूरजमुखी तेल का भी दबाव रोड़ा बन रहा है। पहली बार रैपसीड, सोयाबीन और सूरजमुखी के दाम पामोलीन से नीचे चल रहे हैं। इस स्थिति को तत्काल संभालने की ओर ध्यान देना होगा नहीं तो देश में बची-खुची और नुकसान में भी चलने वाली मिलें बंद होने का खतरा है।
सूत्रों ने कहा कि यह असंभव सी बात लगती है कि जो देश अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर हो वहां तेल मिलें नुकसान में चले या वहां काम ठप रहे।
सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,000-5,100 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,805-6,865 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,710 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,540-2,805 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,600 और 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,570-1,640 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,570-1,680 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,150 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,200 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,285-5,335 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,035-5,125 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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