इंफाल, सात मार्च जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर में लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से सौंपने की दो सप्ताह की समयसीमा के दौरान लोगों ने सुरक्षा बलों को गोला-बारूद समेत एक हजार से अधिक हथियार सौंपे। पुलिस ने समय सीमा समाप्त होने के एक दिन बाद शुक्रवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, यह आंकड़ा अस्थाई है और इंफाल में अधिकारियों के पास सभी जिलों से विवरण पहुंचने के बाद सौंपे गए हथियारों की वास्तविक संख्या बढ़ने की संभावना है।
इंफाल पूर्वोत्तर राज्य की राजधानी है, जहां फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है।
अधिकारी यहां लूटे गए हथियारों और अवैध रूप से खरीदे गए हथियारों को अलग करेंगे।
अधिकारी ने कहा, ‘‘समर्पण अवधि के दौरान घाटी के पांच जिलों, पांच पहाड़ी जिलों और जिरीबाम में लोगों द्वारा लगभग 1,023 हथियार सौंप दिए गए हैं।’’
पूर्वोत्तर राज्य के शेष पांच जिले नगा बहुल हैं, जहां तीन मई 2023 के बाद से जातीय हिंसा की कोई सूचना नहीं हैं।
अन्य 11 जिलों में तीन मई 2023 से अब तक मेइती समुदाय और कुकी समुदाय के बीच संघर्ष में कम से कम 250 लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हो गए।
पहाड़ी क्षेत्र कुकी समुदाय बहुल इलाके हैं जबकि घाटी इलाकों में मेइती समुदाय के लोगों की बहुलता है।
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को लोगों से सुरक्षा बलों से लूटे गए हथियारों और अवैध रूप से रखे गए अन्य हथियारों को सात दिनों के भीतर स्वेच्छा से सौंपने का आग्रह किया था। पर्वतीय और घाटी दोनों क्षेत्रों के लोगों की ओर से अतिरिक्त समय की मांग के बाद समयसीमा को छह मार्च शाम चार बजे तक बढ़ाया गया था।
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