नयी दिल्ली, छह सितंबर डीटीसी की एक हजार लो फ्लोर बसों की खरीद में कथित अनियमितता को लेकर भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता द्वारा दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान देने और ऑनलाइन पोस्ट साझा करने को हटाने का निर्देश देने से एकल न्यायाधीश के इंकार करने के फैसले में दखल देने से दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को इंकार कर दिया।
गुप्ता के वकील ने न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ को आश्वासन दिया कि 20 सितंबर तक भाजपा के नेता इस मुद्दे पर न तो कोई ट्वीट करेंगे न ही प्रेस बयान जारी करेंगे। 20 सितंबर को एकल न्यायाधीश के समक्ष इस मुद्दे पर सुनवाई होने वाली है।
अदालत गुप्ता द्वारा एकल न्यायाधीश के 27 अगस्त के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एकल न्यायाधीश ने एकतरफा दीवानी मानहानि आदेश जारी करने से इंकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘राजनीति में आपको (गहलोत) इतना संवेदनशील नहीं होना चाहिए।’’
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एकल न्यायाधीश द्वारा सुनवाई की तय तारीख पर कोई भी पक्ष स्थगन के लिए नहीं कहेगा और एकल न्यायाधीश से भी आग्रह किया कि इसमें स्थगन नहीं दिया जाए और मामले की सुनवाई जारी रखी जाए।
गहलोत का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील राजीव नायर ने कहा कि एकल न्यायाधीश का रूख सही नहीं था और गुप्ता ने आप नेता के खिलाफ घोटाले के व्यक्तिगत आरोप लगाए।
गुप्ता ने 12 जुलाई को उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर दिल्ली परिवहन निगम द्वारा एक हजार लो फ्लोर बसों में कथित घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
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