रायरंगपुर (ओडिशा), 23 जुलाई तरणीसेन टुडू और उनकी पत्नी सुकरी टुडू देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सोमवार को होने वाले शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं, वहीं उनके उपारबेदा गांव के लोग देश के सर्वोच्च पद पर मुर्मू के विशिष्ट पहचान हासिल करने की कामना कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि तरणीसेन नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाई हैं और वह ओडिशा के मयूरभंज जिले में रायरंगपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर उपारबेदा गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं।
वैसे तो गांव के लोग निर्धन हैं लेकिन वे इस बात से बहुत संतुष्ट हैं कि मुर्मू ने उन्हें गौरवान्वित किया है। आजादी के 75वें साल में देश की राष्ट्रपति के रूप में होने जा रहे उनके शपथग्रहण ने उनकी खुशी बढ़ा दी है।
द्रौपदी मुर्मू के जन्मस्थान उपारबेदा गांव और ससुराल पहाड़पुर के ज्यादातर निवासियों के पास बिजली, पेयजल, फोन सेवा, स्कूल, अस्पताल एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं हैं। वे बस यह चाहते हैं कि मुर्मू राष्ट्रपति के तौर पर अपने एवं राज्य के लिए विशिष्ट पहचान हासिल करें।
संथाल समुदाय के बुजुर्ग पुरोहित सौंटा माझी ने कहा, ‘‘हम किसी भी बात से ज्यादा उनकी सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं।’’
वहीं, चंद्रमणि हंसदा नामक एक महिला ने कहा, ‘‘ क्या हमारे लिए संतुष्ट रहना पर्याप्त नहीं है? मानव इच्छाएं असीमित होती हैं। हमारे गांव की हर लड़की एवं महिला तथा आदिवासी समुदाय ने अब जो विश्वास हासिल किया है, वह कोई सरकार या नेता नहीं दे सकता है।’’
लोगों से यह पूछे जाने पर कि वे गांव के लिए नए राष्ट्रपति से क्या चाहते हैं, तो कई सुझाव सामने आए। लड़के-लड़कियों के एक समूह ने कहा कि वे उपारबेदा में एक महाविद्यालय चाहते हैं क्योंकि उन्हें नजदीक के उच्च शिक्षण संस्थान जाने के लिए कम से कम पांच किलोमीटर चलना पड़ता है।
कुछ महिलाओं ने कहा कि गांव में एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र तो है लेकिन वहां पूर्णकालिक डॉक्टर या महिला नर्स नहीं है। उपारबेदा ग्राम पंचायत की सरपंच जमुना हेम्ब्रम ने कहा कि अस्पताल में महिला नर्स नहीं होने के कारण महिलाएं संस्थानात्मक प्रसव के लिए जाने को इच्छुक नहीं रहती हैं।
हेम्ब्रम ने कहा कि युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र बनने पर गांव से बड़े पैमाने पर होने वाले प्रवासन पर रोक में मदद मिल सकती है।
वहीं, एक गर्भवती महिला ने कहा कि यदि उसके बेटी पैदा होती है तो उसका नाम ‘द्रौपदी’ रखा जाएगा।
सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में द्रौपदी मुर्मू से दो साल वरिष्ठ रहे सुखलाल मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे यहां गांव में सड़कें, स्कूल, अस्पताल और फोन हैं। यदि उनकी मर्जी हो तो हम अपने खेतों की सिंचाई के वास्ते प्राकृतिक झरने पर बांध चाहेंगे। हमारी खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर है।’’
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोरंजन मुर्मू ने भी कहा कि वे कोई बड़ी परियोजना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम विद्यालय के लिए बेहतर अवसरंचना चाहते हैं। इसे आदर्श विद्यालय बनाया जाना चाहिए। जब निर्माण कार्य हो जाएगा तब हम एक कक्षा का नाम उनके नाम पर रखेंगे।’’
उपारबेदा और पहाड़पुर के ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांवों में बैंक कियोस्क हैं, लेकिन अब बैंक की पूर्ण शाखा की जरूरत है।
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