नयी दिल्ली, 25 अगस्त वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भारत की जमीनी सीमा से लगे देशों के उन बोलीदाताओं के लिये पंजीकरण प्रारूप जारी किया है जो यहां की सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं।
सरकार ने 23 जुलाई को एक आदेश में कहा कि भारत की जमीनी सीमा से लगे देशों के बोलीदाता वस्तुओं और सेवाओं की खरीद अथवा परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर तभी बोली लगाने के लिये पात्र होंगे, जब वे उचित प्राधिकरण के पास पंजीकृत होंगे।
चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच यह निर्णय किया गया।
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने एक कार्यालय ज्ञापन में कहा, ‘‘इसके अनुसार, जो बोलीदाता उन देशों से जुड़े हैं जिनकी जमीनी सीमा भारत से साझा होती है और वे भारत में सार्वजनिक खरीद में शामिल होना चाहते हैं, वे प्रारूप के तहत पंजीकरण के लिय आवेदन दे सकते हैं...।’’
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बोलीदाताओं को प्रारूप के तहत सुरक्षा मंजूरी के लिये भी आवेदन देना होगा।
पंजीकरण पत्र जारी होने के बाद पंजीकरण की वैधता अवधि 12 महीने होगी।
इसमें कहा गया हे, ‘‘हालांकि 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी वाले नये निदेशक/शेयरधारकों को शामिल करने/नियंत्रणकारी मालिकाना हक में बदलाव या अन्य माध्यमों से नियंत्रण की स्थिति में पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।’’
ऐसी स्थिति में बोलीदाताओं को नये सिरे से पंजीकरण के लिये आवेदन देने की जरूरत होगी।
उचित प्राधिकरण से पंजीकृत बोलीदाताओं की सूची डीपीआईआईटी पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
सरकार ने सामान्य वित्तीय नियम 2017 में संशोधन किया है। इसका मकसद उन देशों के बोलीदाताओं पर पाबंदी लगाना जिनकी जमीनी सीमाएं भारत से मिलती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
प्रारूप के तहत बोलीदाता को मालिकाना हक, विनिर्माता/सेवा प्रदाता/ठेकेदार, उन वस्तुओं का ब्योरा जिसके लिये पंजीकरण चाहिए, भारत के चार्टर्ड एकाउंटटें से प्रमाणित पिछले पांच साल का वित्तीय ब्योरा और भारत में पिछले पांच साल में मिले अनुबंधों के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी।
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