अगरतला, पांच मई त्रिपुरा के धलाई जिले के जन स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में मलेरिया से पीड़ित दो बच्चों की मौत के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने एक चिकित्सक की पिटाई कर दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पीएचसी की ओर से लापरवाही के कारण दोनों मौतें हुईं हैं। पुलिस और चिकित्सा संस्थान के अधिकारियों ने दावा किया कि दोनों बच्चे पहले से ही गंभीर स्थिति में थे जब उन्हें यहां लाया गया था।
मानिकपुर थाना क्षेत्र के राजधार गांव की आठ वर्षीय धर्मिता रियांग और छह वर्षीय खलानजॉय त्रिपुरा तेज बुखार से पीड़ित थे और उन्हें बुधवार को पीएचसी लाया गया। हालांकि, बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
खबर फैलते ही स्थानीय लोगों ने मानिकपुर जन स्वास्थ्य केंद्र पर धावा बोल दिया और हंगामा किया। पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रणब देबबर्मा को गंभीर रूप से पीटा गया, जिसके कारण उन्हें सिर में चोटें आईं और वर्तमान में अगरतला में उनका इलाज चल रहा है।
मानिकपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ देबबीर दास ने पत्रकारों से बताया, ''गंभीर हालत में देर से पीएचसी लाए जाने के कारण दोनों बच्चों की मौत हो गई। हमले में डॉ देबबर्मा को कई चोटें आई हैं।''
पुलिस अधीक्षक रमेश यादव ने बताया कि मृतक के परिवार के सदस्यों ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की है, लेकिन डॉक्टर पर हमले के संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है और इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा, आगे की जांच जारी है।
उन्होंने कहा, ''मलेरिया के दो मरीजों की हालत गंभीर थी। उनमें से एक बेहोश था जब उसे पीएचसी लाया गया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की।''
हमले की आलोचना करते हुए, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की त्रिपुरा इकाई के उपाध्यक्ष डॉ सौविक देबबर्मा ने ''पीटीआई-'' से कहा, ''हर किसी की मौत दुखद है लेकिन जिस तरह से चिकित्सा अधिकारी पर हमला किया गया वह निंदनीय है। हमें समाज से ऐसी असहिष्णुता की उम्मीद नहीं है।''
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