उन्होंने कहा कि इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने सकारात्मक रुख दिया और अपना निर्णय एकमत से दिया। उसमें कहा गया कि संसद को इस बारे में कानून बनाने का अधिकार है।
पात्रा ने कहा कि अब जब कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय आ चुका है तो इस बारे में यह सोचना उपयुक्त नहीं है कि यह सही है या नहीं। उन्होंने कहा कि सांसद उच्चतम न्यायालय से यह उम्मीद करते हैं कि जब कोई कानून बने तो सर्वोच्च न्यायालय उसे संविधान के अनुरूप ठहराये किंतु जब उसका कोई निर्णाय आता है और उस पर टीका टिप्पणी होती है तो कोई सांसद शीर्ष अदालत के समर्थन में खड़ा नहीं होता।
वाईएसआर कांग्रेस के अयोध्या रामी रेड्डी आला ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इस विधेयक के प्रस्तावों के कारण स्थानीय निकायों में ओबीसी एवं महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पाटी के संतोष कुमार पी ने जम्मू कश्मीर में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराये जाने की मांग की। रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार को ओबीसी के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने का भी सुझाव दिया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जान ब्रिटास ने कहा कि जिस प्रकार जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा छीना गया, इसी प्रकार भविष्य में किसी भी अन्य राज्य का दर्जा छीना जा सकता है और इस आशंका की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने सरकार से जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इन विधेयकों में प्रावधान किया गया है कि चुनाव लड़ने के लिए मानसिक रूप से संतुलित नहीं होने के अलावा यदि राज्य चुनाव आयोग कोई अन्य उपबंध को लागू करना चाहे तो इसके लिए उसे अधिकार होगा। उन्होंने इस प्रावधान का कड़ा विरोध किया।
भाजपा के आदित्य प्रसाद ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने वहां पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास का उदाहरण दिया।
कांग्रेस के नीरज डांगी ने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार जम्मू कश्मीर के अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूह के लोगों के कल्याण के लिए क्या कोई पैकेज लेकर आएगी?
उन्होंने दावा कि सरकार जम्मू कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव में हारने की आशंका देखते हुए वहां विधानसभा चुनाव नहीं करवा रही है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आये हैं और उनकी मांग है कि उन्हें छठी सूची में शामिल किया जाए।
डांगी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद सरकार ने कहा था कि वहां आतंकवाद समाप्त होगा किंतु पिछले कुछ सालों में वहां आतंकवाद की बहुत घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक अनुसूचित जनजाति के एक मुख्यमंत्री को जमीन के फर्जी मामले में हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं करने का सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि यूजीसी की जो मसौदा नीति आयी थी, यदि उसका विरोध नहीं होता तो आरक्षण खत्म किए जाने के प्रयास शुरू हो जाते। उन्होंने जातिगत जनगणना की मांग दोहरायी।
तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार ने कहा कि इन विधेयकों के जरिये जम्मू कश्मीर के गुज्जर एवं बकरवाल को आरक्षण लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो मुस्लिमों की कुछ जातियों को आरक्षित सूची में रख रही है वहीं देश के अन्य मुसलमानों को आरक्षण से वंचित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आदिवासी ईसाई बन जाए तो उसे आरक्षण सुविधा नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि यह बांटो और राज करो की नीति है।
उन्होंने कहा कि जाति एवं कबीलों की राजनीति औपनिवेशिक काल की देन है और इसे बनाये क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ आदिवासी यदि दूसरा धर्म अपना लेते हैं तो उन्हें आरक्षण सुविधा से वंचित क्यों करना चाहिए?
सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों में साक्षरता की दर काफी बेहतर है। उन्होंने कहा कि देश में आरक्षण की नीति को प्रभावहीन बनाने के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि आरक्षण नीति को स्पर्श ना किया जाए।
वाईएसआर कांग्रेस के रायगा कृष्णैया ने तीनों विधेयकों का इसलिए समर्थन किया क्योंकि ये जम्मू कश्मीर के लिए लाये गये हैं। उन्होंने अपनी बात तेलुगु में रखी।
चर्चा में हिस्सा लेते माकपा के ए ए रहीम ने कहा कि वह इन विधेयकों का विरोध नहीं करते हैं लेकिन यह जरूर कहेंगे कि यह केंद्र सरकार की वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वहां विधानसभा चुनाव क्यों नहीं करा रही है जबकि उच्चतम न्यायालय ने भी सरकार को वहां तत्काल चुनाव कराने को कहा है।
भाजपा के राकेश सिन्हा ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से कश्मीर के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा और वह सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकेंगे।
भाजपा की सुमित्रा बाल्मीक ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों के कारण समाज के ये वर्ग आरक्षण के लाभ से दशकों तक वंचित रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इन समुदायों का शोषण किया वहीं ये विधेयक लाकर प्रधानमंत्री मोदी ने उनके पोषण का काम किया है।
भाजपा की रमीलाबेन बेचारभाई बारा और शंभु शरण पटेल ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
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