ताजा खबरें | अविश्वास चर्चा तीन अंतिम लोस

इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) के सदस्यों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई।

चर्चा में भाग लेते हुए शिरोमणि अकाली दल (एम) के सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा हो रही है जो चिंता की बात है।

चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव गलत समय पर और गलत तरीके से लाया गया है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत का प्रभाव बढ़ रहा है और विभिन्न देश भारत के साथ काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में जी20 की बैठकें हो रही हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक देश के मजबूत राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

रिजिजू ने पूर्ववर्ती सरकारों पर पूर्वोत्तर क्षेत्र को नजरंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस क्षेत्र का विकास हो रहा है और यह क्षेत्र भारत का विकास इंजन बनने की ओर बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को मुख्यधारा के केंद्र में लाने का काम किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मणिपुर की स्थिति आज पैदा नहीं हुई है बल्कि यह चिंगारी वर्षों पहले की है।

उन्होंने भाजपा नीत सरकार आने के बाद पूर्वोत्तर के विकास और इस क्षेत्र में अलगावाद को रोकने के लिए उठाये जाने वाले कार्यों का उल्लेख किया।

रिजिजू ने कहा कि अरूणचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर और लद्दाख, कश्मीर तक केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों सहित आधारभूत ढांचे के विकास की दिशा में जोरदार काम किया और आज इन इलाकों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

उन्होंने खेलों के विकास और विज्ञान एवं अंतरिक्ष क्षेत्रों में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों एवं कार्यो का भी उल्लेख किया और खासतौर पर चंद्रयान-3 मिशन का जिक्र किया।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन पांच बिंदुओं- आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्थाओं की स्वायत्तता, कूटनीतिक रिश्ते और सांप्रदायिक सद्भाव पर किया जाता है, लेकिन इन पांचों बिंदुओं पर सरकार पूरी तरह विफल रही है।

उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव मणिपुर को केंद्रित करते हुए लाया गया है।

तिवारी ने कहा कि मणिपुर की सीमा म्यामां जैसे देश से लगती है जिसके सैन्य शासन के चीन के साथ रिश्ते जगजाहिर हैं।

उन्होंने कहा कि इसलिए मणिपुर या उत्तर पूर्व के किसी राज्य में सामाजिक उथल पुथल होती है तो उसका असर केवल उस राज्य पर नहीं बल्कि पूरे उत्तर पूर्व पर और देश की सुरक्षा पर पड़ता है।

तिवारी ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रशासत प्रदेश के गठन को चार साल हो गये हैं, लेकिन अभी तक वहां चुनाव नहीं कराये गये हैं।

वहीं, निर्दलीय सदस्य नवनीत राणा ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए अविश्वास प्रस्ताव का विरोध किया।

उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना के कई दिन बाद जानबूझकर संसद सत्र से कुछ दिन पहले यह वीडियो जारी किया गया।

राणा ने कहा कि इस वीडियो को जानबूझकर जारी करके जिस तरह महिलाओं को बदनाम किया गया है, उसकी जांच होनी चाहिए।

निर्दलीय सदस्य ने कहा कि राजस्थान में पिछले दिनों नाबालिग से दुष्कर्म की एक घटना पर विपक्ष के एक भी सदस्य ने कुछ नहीं कहा।

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल मणिपुर में हिंसा के 70 दिन बाद क्यों गया। उन्होंने पूछा कि यह प्रतिनिधिमंडल राजस्थान आज तक क्यों नहीं गया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘महिलाओं का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा रहा है।’’

राणा ने कहा कि विपक्ष के सदस्य पूछते हैं कि ‘‘प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं, मैं उनसे पूछती हूं कि वे राजस्थान और पश्चिम बंगाल पर मौन क्यों हैं?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दलों का मकसद मणिपुर या महिलाओं के प्रति संवेदना दिखाना नहीं बल्कि ‘सिर्फ मोदी का विरोध करना है।’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के ए एम आरिफ ने कहा कि संसद के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि मणिपुर जैसे गंभीर विषय पर प्रधानमंत्री को सदन में लाने के लिए पूरे विपक्ष की सर्वसम्मति से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।

आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पूरे देश के अनेक हिस्सों में सांप्रदायिक वैमनस्य के मामले सामने आ रहे हैं और ऐसा अतीत में कभी नहीं देखा गया।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सांप्रदायिक दंगों के पीछे लोगों के बीच विभाजन करके राजनीतिक फायदा उठाने का एजेंडा है।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि मणिपुर में स्थिति बहुत खराब है जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि इस अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से इस सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराने का यह सही समय है।

चर्चा अधूरी रही।

वैभव हक दीपक

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