इंफाल, 10 अगस्त मणिपुर के ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम’ (आईटीएलएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य में जातीय हिंसा के बारे में लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों से आदिवासी और कुकी-ज़ो समुदाय के सदस्यों को निराशा हुई है।
आदिवासियों के संगठन आईटीएलएफ ने एक बयान में कहा कि मणिपुर में तीन महीने से जारी हिंसा के चलते 130 से अधिक कुकी-जो आदिवासियों की मौत हुई है। इसके अलावा 41,425 आदिवासी विस्थापित हुए हैं और मेतेई व आदिवासी शारीरिक और भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो गए हैं।
बयान में कहा गया, “और सबसे अच्छा स्पष्टीकरण जो गृह मंत्री दे सकते हैं वह है म्यांमा से शरणार्थियों का प्रवेश।”
आईटीएलएफ ने कहा कि मिजोरम ने म्यांमा से आए 40,000 से अधिक शरणार्थियों और मणिपुर से विस्थापित लोगों का स्वागत किया है और यह अभी भी भारत का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है।
आईटीएलएफ ने कहा कि शरणार्थियों पर ऐसा संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाना बिलकुल "गलत" है।
बुधवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने कहा था कि पड़ोसी देश में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद उग्रवादियों पर हुई कार्रवाई के चलते वहां से कुकी शरणार्थियों की आमद के कारण मणिपुर में समस्याएं शुरू हुईं।
शाह ने कहा कि कुकी शरणार्थियों ने मणिपुर घाटी के जंगलों में बसना शुरू कर दिया, जिससे क्षेत्र में जनसांख्यिकीय में बदलाव की आशंका बढ़ गई है।
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