कोलकाता, 13 सितंबर भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिवालय तक मार्च के बीच उस समय भ्रम की स्थिति पैदा हो गई जब एक जुलूस का नेतृत्व कर रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद “नबन्ना रैली समाप्त” करने की अचानक घोषणा कर दी और उस स्थल से वापस चले गए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोष ने रैली समाप्त करने की घोषणा उस समय की जब अपराह्न लगभग ढाई बजे सचिवालय ‘नबन्ना’ की ओर जा रहे जुलूस को रबींद्र सेतु (हावड़ा ब्रिज) के पास पुलिस ने रोक दिया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।
तृणमूल कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार के विरोध में भाजपा ने अलग-अलग नेताओं के नेतृत्व में अलग-अलग जगहों से तीन जुलूस निकाले।
जब नबन्ना अभियान समाप्त करने की घोष की घोषणा के बारे में भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को बताया गया तो उन्होंने कहा, ‘‘दिलीप दा का जुलूस पुलिस ने रोक दिया होगा और वह समाप्त हो गया, लेकिन अन्य जुलूस जारी हैं।’’
पुलिस ने मजूमदार की रैली को भी रोक दिया और वह विरोध में सड़क पर बैठ गए। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
घोष ने बाद में ‘पीटीआई-’ से कहा कि मीडिया ने उनकी टिप्पणी को गलत समझा।
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