27 मई की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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दक्षिणी लेबनान पर इस्राएल के हमले में 31 लोगों की मौत

बायजू के फाउंडर रवींद्रन को 6 महीने की जेल

केरल: सीएमआरएल मामले में पिनाराई विजयन के घर ईडी की छापेमारी

चीन के दौरे पर जर्मन मंत्री ने खुली बातचीत की मांग रखी

बढ़ते ईंधन खर्च से एयर इंडिया ने घटाई घरेलू उड़ानें

एसआईआर संविधान की कसौटी पर खराः सुप्रीम कोर्ट

असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास

सीबीएसई रिजल्ट पर घमासान: राहुल गांधी ने लगाया "गड़बड़ी" का आरोप

ईरान में इंटरनेट की सेवा बहाल हो रही है

जर्मनी के सबसे अमीर लोगों के पास देश की एक चौथाई संपत्ति

इस्राएल ने हमास की हथियारबंद शाखा के नए प्रमुख को मारने का दावा किया

हंगरी की संसद ने आईसीसी में बने रहने के बिल को मंजूरी दी

जर्मनी से अमेरिकी सेना हटी तो हजारों लोगों की नौकरी जाएगीः रिसर्च

जर्मनी में तैनात अमेरिकी सेना की वापसी से इलाके में हजारों लोगों की नौकरियां खत्म होंगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जर्मनी से 5 हजार सैनिकों को वापस बुलाने की धमकी दी है. बुधवार को छपी एक रिसर्च स्टडी में नौकरियां खत्म होने की बात कही गई है.

लाइबनिज सेंटर फॉर यूरोपीयन इकोनॉमिक रिसर्च (जेडईडब्ल्यू), कोलोन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि हरेक सैनिक की वापसी का नतीजा प्रभावित क्षेत्र में दूरगामी नतीजों के रूप में एक आदमी की नौकरी को खत्म करेगा.

यह रिसर्च 1990 में शीतयुद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी से 20,000 सैनिकों की वापसी पर आधारित है. उसकी वजह से तब इलाके को बड़ा आर्थिक झटका लगा था. रिसर्चरों ने इसे समझाते हुए कहा है कि अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों का उपभोग खत्म होने की वजह से कारोबार का टर्नओवर घटता है. इसका असर इलाके के कमजोर श्रम बाजार पर सबसे ज्यादा होता है. इतना ही नहीं सार्वजनिक खर्च का भी नुकानस होता है. प्रभावित इलाके और उसकी आसपास की म्युनिसिपल्टियों का राजस्व घटेगा जिसका असर उनके बजट पर होगा.

रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि नकारात्मक नतीजे कुछ समय के लिए बने रहते हैं. सैनिक अड्डा बंद होने के बाद नौकरी गंवाने वाले कामगारों को बाद के कई सालों तक पर्याप्त काम के मौके नहीं मिलते और उनकी आय पर दीर्घकालीन असर पड़ता है.

मानव तस्करी से जुड़े कानून सख्त बना रहा है जर्मनी

मानव तस्करी को रोकने के लिए जर्मनी कठोर सजा की योजना बना रहा है. बुधवार को इस बारे में बने प्रस्तावित कानून को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित कानून का लक्ष्य पीड़ितों और जगहों से हटा कर तस्करों पर ध्यान देना है और उन लोगों पर जो जान बूझ कर उनकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं.

अब तक देह व्यापार में सिर्फ उन ग्राहकों पर अभियोग चलता था जो जान बूझ कर तस्करी कर लाए गए व्यक्ति की सेवाओं का उपयोग कर रहे थे. सुधारों के बाद आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में वो सारे सेक्टर आएंगे जहां आमतौर पर शोषण होता है. इनमें निर्माण और सौंदर्य उद्योग भी शामिल हैं. इसका मतलब है कि किसी नाखून संवारने वाले सेलॉन के ग्राहकों पर भी अभियोग चलाया जा सकता है अगर नाखून संवारने वाला व्यक्ति तस्करी के जरिए वहां आया है. कानून में ये सुधार इसलिए लाए जा रहे हैं क्योंकि मानव तस्करी से जुड़े बहुत कम ही मामले अदालतों तक पहुंच पाते हैं.

कानून में सुधार कर सजा को भी बढ़ाया जा रहा है. फिलहाल मानव तस्करी के लिए छह महीने से लेकर पांच साल तक की सजा हो सकती है. गंभीर मामलों में जहां हिंसा और अपहरण या फिर संगठित अपराध शामिल हो वहां 10 साल तक के कैद की सजा का प्रावधान है. इसे बदल कर अब तस्करी से जुड़े सभी मामलों में कैद की सजा 10 साल तक की जा रही है.

अफ्रीका में खूब बिक रहे हैं भारत के मीठे बिस्किट

भारत के मीठे बिस्किट के निर्यात में तेजी देखी जा रही है, और अफ्रीका इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर रहा है. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन वाणिज्य विभाग ने बताया कि भारतीय मीठे बिस्किट वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहे हैं. यह रुझान दिखाता है कि भारत का मूल्य-वर्धित खाद्य उत्पाद निर्यात मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसकी पहुंच बढ़ रही है.

मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 344.2 हजार टन मीठे बिस्किट का निर्यात किया. यह आंकड़ा भारतीय प्रोसेस्ड फूड उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है. विभाग ने कहा कि स्थापित बाजारों के साथ-साथ उभरते देशों में भी भारतीय खाद्य उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ रही है, जिससे भारत का वैश्विक उपभोक्ता बाजारों के साथ एकीकरण और मजबूत हुआ है.

अफ्रीकी देशों के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंधों के बीच केन्या भारत के लिए मीठे बिस्किट का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात ठिकाना बनकर उभरा है. विभाग ने कहा कि अफ्रीका की तेजी से बढ़ती उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाएं इस मांग को बढ़ावा दे रही हैं.

हंगरी की संसद ने आईसीसी में बने रहने के बिल को मंजूरी दी

हंगरी की संसद ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत, आईसीसी का सदस्य बने रहने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. विक्टर ओरबान के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने इस अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल से पिछले साल बाहर निकलने का फैसला किया था. यह दुनिया की एकमात्र स्थाई अंतरराष्ट्रीय अदालत है जहां युद्ध अपराध और नरसंहार जैसे मामलों की सुनवाई होती है.

अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत ने इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के खिलाफ गाजा युद्ध के सिलसिले में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. वारंट जारी होने के कुछ ही दिन बाद नेतन्याहू हंगरी के आधिकारिक दौरे पर आए थे. आईसीसी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नेतन्याहू के हिरासत में नहीं लेने के लिए ओरबान सरकार की आलोचना की थी. ओरबान ने आईसीसी पर "राजनीतिक अदालत" बनने का आरोप लगाया था. हंगरी के आईसीसी से बाहर होने का फैसला 2 जून से लागू होना है.

इस फैसले को वापस लेने के लिए सोमवार को हंगरी के प्रधानमंत्री पेटर मॉजार ने संसद में बिल पेश किया. इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय शांति को बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए, "यह जरूरी है कि जो लोग सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध करते हैं उन्हें अंतरराष्ट्रीय न्यायिक फोरम के सामने जिम्मेदार ठहराया जाए."

इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है, "इस सिरे पर यह जरूरी है कि हंगरी की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत के आधिकारिक नियम में बनी रहे."

हंगरी की संसद में बिल के पक्ष में मॉजार की सत्ताधारी तिसा पार्टी के 133 सांसदों ने वोट दिया. 37 लोगों ने इसके विरोध में जबकि पांच लोग इस दौरान संसद से गैरहाजिर रहे. हंगरी आईसीसी के संस्थापक सदस्यों में है और खुद ओरबान ने इसे बनाने की ट्रीटी पर 1999 में दस्तखत किए थे.

उत्तर कोरिया ने हल्के मिसाइल लॉन्च सिस्टम का परीक्षण किया

उत्तर कोरिया ने मंगलवार को एक नए हल्के बहुद्देशीय मिसाइल लॉन्च सिस्टम और कई क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है. इन्हें हाल ही में विकसित किया गया है. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने खबर दी है कि देश के शासक किम जोंग उन के सामने ये परीक्षण किए गए.

मंगलवार को दक्षिण कोरिया सेना ने खबर दी थी कि उत्तर कोरिया ने कई बैलिस्टिक मिसाइल दागे हैं जिनकी रेंज 300 किलोमीटर से कम है. इसके अलावा देश के उत्तर पश्चिम में चोंगजू शहर के आसपास रॉकेट भी दागे गए हैं

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए का कहना है कि मंगलवार किए गए परीक्षण, "आर्टिलरी और मिसाइलों की आधुनिकीकरण का हिस्सा थे और सेना के राष्ट्रीय सुरक्षा विकास के पंचवर्षीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयार किए गए थे."

ऐसी खबरें हैं कि किम जोंग उन ने इन परीक्षणों की तारीफ में कहा है कि ये उत्तर कोरिया की युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में हुई तकनीकी प्रगति के संकेत हैं. यह इस साल उत्तर कोरिया का आठवां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण था. इससे पहले 19 अप्रैल को उत्तर कोरिया ने कम दूरी के कई मिसाइल का परीक्षण किया था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों के तहत उत्तर कोरिया पर इन मिसाइलों के परीक्षण के लिए प्रतिबंध लगे हैं.

असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास

असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) 2026 विधेयक पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे निजी मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है. यह कानून सभी धर्मों के लोगों पर समान रूप से लागू होगा और राज्य में अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित करेगा.

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विधेयक के तहत बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार जैसे प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं के लिए न्यूनतम विवाह आयु क्रमश 21 और 18 वर्ष रखी गई है, जबकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से बाहर रखा गया है.

विधानसभा में इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध किया और इसे विस्तृत चर्चा के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की, लेकिन स्पीकर ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और सदन के वेल में आकर नारेबाजी की, जबकि सरकार ने विधेयक को पारित करा लिया. इस कदम के साथ असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी कानून पारित करने वाला तीसरा राज्य बन गया.

सीबीएसई रिजल्ट पर घमासान: राहुल गांधी ने लगाया "गड़बड़ी" का आरोप

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सीबीएसई कक्षा 12 के परीक्षा परिणामों में "भारी गड़बड़ी" और "हेर-फेर" का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों छात्र और उनके अभिभावक इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं. राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो जारी कर केंद्र सरकार और सीबीएसई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी गठित करने की मांग की.

उन्होंने विशेष रूप से COEMPT नाम की कंपनी को लेकर सवाल उठाए, जिसे सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम का ठेका दिया गया है. राहुल गांधी का दावा है कि यह कंपनी पहले "ग्लोबरेना" नाम से जानी जाती थी और 2019 में तेलंगाना परीक्षा विवाद से जुड़ी रही है. उन्होंने पूछा कि ऐसे विवादित रिकॉर्ड वाली कंपनी को क्यों चुना गया और क्या ठेका देने में नियमों का उल्लंघन हुआ.

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यह विवाद सीबीएसई के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम (ओएसएम) से जुड़ा है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन जांच की जाती है. नतीजे घोषित होने के बाद छात्रों ने बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें धुंधली स्कैन कॉपियां, गलत अंक, बिना जांचे उत्तर और कुछ मामलों में गलत उत्तर पुस्तिका अपलोड होने जैसे आरोप शामिल हैं. एक छात्र के मामले में सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिका के अदला-बदली की बात स्वीकार भी की है और सुधार की प्रक्रिया शुरू की है.

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए अपने पोस्ट में लिखा, "सीबीएसई परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं. और मोदी जी? हमेशा की तरह - ना जवाब, ना जिम्मेदारी, ना शर्म."

ईरान में इंटरनेट की सेवा बहाल हो रही है

ईरान की सरकार ने मंगलवार को कहा है कि देश में इंटरनेट सेवा बहाल की जा रही है. ईरान पर अमेरिका इस्राएल के हमले के साथ ईरान में युद्ध शुरू हो गया. इसके बाद करीब 90 दिनों से देश में इंटरनेट बंद था.

ईरान सरकार के प्रवक्ता फातेमेह मोहजेरानी ने कहा है कि अधिकारियों ने सोमवार 25 मई को इस बारे में फैसला ले लिया था. आने वाले दिनों में जल्दी ही लोगों के "इन वैध अधिकारों को बहाल कर दिया जाएगा." इस फैसले पर पहुंचने से पहले ईरान के तमाम सरकारी विभागों की कई बैठकें हुई हैं.

मंगलवार को एक्स पर शेयर किए गए एक पोस्ट में नेटब्लॉक्स का कहना है कि लाइव डाटा ईरान में आंशिक रूप से इंटरनेट की कनेक्टिविटी बहाल होना दिखा रहे हैं. ईरान के लोगों ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जताई है और इसे सकारात्मक कदम कहा है. फिलहाल ब्रॉडबैंड की सेवा बहाल कर दी गई है लेकिन मोबाइल इंटरनेट अब भी बंद है.

जर्मनी के सबसे अमीर लोगों के पास देश की एक चौथाई संपत्ति

जर्मनी के 5000 सबसे अमीर लोगों के पास देश की कुल आर्थिक संपत्ति का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा है. बोस्टन कंसल्टिंक ग्रुप (बीसीजी) की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह जानकारी दी गई है. जर्मनी में 10 करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति रखने वाले लोगों की संख्या 2025 में एक साल पहले के मुकाबले करीब 1,100 बढ़ गई. बीसीजी की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी की कुल वित्तीय संपत्ति यानी 12.4 लाख करोड़ डॉलर में से 27.3 फीसदी यानी 3.4 लाख करोड़ डॉलर इन्हीं लोगों के पास है.

बीसीजी का कहना है कि बेहद अमीर लोगों को पिछले साल शेयर बाजार में हुए लाभ का फायदा मिला और जर्मनी की वित्तीय संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी 2030 तक बढ़ कर 29 फीसदी तक जा सकती है.

दूसरी तरफ जर्मनी के करीब 6.6 करोड़ लोगों के पास 2,50,000 डॉलर से कम की वित्तीय संपत्ति है. कुल वित्तीय संपत्ति में देखें तो यह हिस्सा करीब 35.9 फीसदी है. 7 लाख से ज्यादा करोड़पति, 5000 बेहद अमीर लोगों के साथ मिल कर जर्मनी की आधी वित्तीय संपत्ति पर नियंत्रण रखते हैं.

जर्मनी का टोटल नेट वर्थ 2025 में 15 फीसदी बढ़ कर 23.3 लाख करोड़ पर जा पहुंचा. इसमें मजबूत शेयर बाजार की वजह से वित्तीय संपत्ति में करीब 18 फीसदी का इजाफा हुआ. रियल एस्टेट बढ़ कर 13.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और यह कुल संपत्ति का करीब आधा है.

जर्मन लोग अब भी सजग निवेशक माने जाते हैं. घरेलू संपत्ति को रखने के लिए नगद और जमा ही आज भी सबसे बड़ा जरिया है. हालांकि धीरे धीरे लोग दूसरी चीजों की तरफ भी रुख कर रहे हैं.

ईरान में फंसे 10 भारतीय नाविक रिहा, जल्द लौटेंगे भारत

भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने एमवी हार्बर फिनिक्स में मौजूद 10 भारतीय नाविकों की सफल रिहाई का एलान किया है. ये नाविक जुलाई 2025 में ईरान के जस्क पोर्ट के पास जहाज रोके जाने के बाद हिरासत में लिए गए थे और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया था.

करीब 9-10 महीनों बाद ये रिहा हुए. भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने एक बयान जारी कर 'कूटनीतिक प्रयासों के सफल' होने की पुष्टि की. सोसल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए बयान के अनुसार, सभी नाविक अब सुरक्षित हैं और जल्द ही उनकी भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2025 में ईरान के जस्क पोर्ट के पास जहाज को रोके जाने के बाद इन भारतीय नाविकों को हिरासत में लिया गया था. बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया था, जिसके बाद उनके परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे थे.

सरकार ने बताया कि विदेश मंत्रालय, पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास, जहाज प्रबंधन कंपनी और अन्य संबंधित एजेंसियों ने मिलकर लगातार कूटनीतिक प्रयास किए. इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि सभी नाविकों की रिहाई संभव हो सकी.

फिलहाल सभी नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें एक-दूसरे से मिलवा दिया गया है. अब उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने की तैयारियां की जा रही हैं.

इस्राएल ने हमास की हथियारबंद शाखा के नए प्रमुख को मारने का दावा किया

इस्राएल ने बुधवार को कहा है कि उसने हमास की हथियारबंद शाखा के नए प्रमुख मोहम्मद ओदेह को मार दिया है. इस्राएल के मुताबिक एक दिन पहले हुए हमले में ओदेह की मौत हुई है. ओदेह के पूर्ववर्ती को भी इसी तरह के हमले में इसी महीने मार दिया गया था. हमास ने इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इस्राएली रक्षा मंत्री इस्राएल कात्ज ने एक्स पर डाले पोस्ट में इस्राएली सेना को इसके लिए बधाई दी है. मंगलवार को हमले की घोषणा करते हुए कात्ज और इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि "ओदेह ने हमास की खुफिया शाखा के प्रमुख के रूप में 7 अक्टूबर के नरसंहार में भूमिका निभाई थी. एक हफ्ते पहले मोहम्मद ओदेह ने एज्जेदीन अल-हद्दाद की जगह ली थी." 15 मई के इस्राएली हमले में हद्दाद की मौत हुई थी.

नेतन्याहू और कात्ज का कहना है, "ओदेह बहुत से इस्राएली आम लोगों और आईडीएफ के सैनिकों की हत्या, अपहरण और उन्हें चोट पहुंचाने का जिम्मेदार था."

इस्राएल पर 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद नेतन्याहू ने हमले के नेताओं को खत्म करने की शपथ ली थी. इस हमले में 1,221 लोगों की मौत हुई थी. इस्राएल की जवाबी कार्रवाई में गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 72,803 लोगों की मौत हुई है.

बढ़ते ईंधन खर्च से एयर इंडिया ने घटाई घरेलू उड़ानें

एयर इंडिया ने बढ़ती ईंधन कीमतों के चलते जून से अगस्त 2026 के बीच अपनी घरेलू उड़ानों में अस्थायी कटौती करने का फैसला किया है. एयरलाइन ने कहा कि यह निर्णय चुनिंदा घरेलू रूट पर लागू होगा और इसका उद्देश्य ऑपरेशनल दबाव को कम करना है. कंपनी के अनुसार, यह कदम पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौतियों के बाद उठाया गया है, जहां पहले ही कई रूट पर सेवाएं घटाई जा चुकी हैं.

ईयू में जेट फ्यूल की कमी का खतरा, उड़ानें हो सकती हैं रद्द

एयर इंडिया ने बताया कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से संचालन लागत पर भारी असर पड़ा है, जिससे कई उड़ानें आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह गई हैं. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण उड़ानों को लंबा मार्ग लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खपत और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं.

एयर इंडिया ने यात्रियों को भरोसा दिया है कि इन बदलावों से प्रभावित यात्रियों की पूरी मदद की जाएगी. एयरलाइन के मुताबिक, “इन बदलावों से प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों में समायोजन, मुफ्त तारीख बदलने की सुविधा या लागू होने पर पूरा रिफंड दिया जाएगा.”

एसआईआर संविधान की कसौटी पर खराः सुप्रीम कोर्ट

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले में निर्णय दिया. याचिकाओं में चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे एसआईआर की वैधता को चुनौती दी गई थी. अदालत को यह तय करना था कि क्या चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत वर्तमान स्वरूप में एसआईआर कराने का अधिकार है.

पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों के मताधिकार पर सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण सवालों पर विचार किया. इनमें यह भी शामिल था कि क्या चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का संवैधानिक अधिकार है और क्या एसआईआर के जरिए आयोग नागरिकता तय करने की कोशिश कर रहा है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है, तो यह भी देखना होगा कि उसकी प्रक्रिया क्या होगी. हालांकि, केवल प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर पूरे एसआईआर को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं.

पश्चिम बंगाल में क्यों कड़ी चुनौती है एसआईआर की प्रक्रिया?

बेंच ने यह भी कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या इस समय एसआईआर कराने की कोई वैध आवश्यकता है. अदालत की राय में एसआईआर के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे. चीफ जस्टिस ने कहा कि एसआईआर बिहार में चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व से ध्यान नहीं भटकाता. उन्होंने मतदाताओं पर खुद को साबित करने का बोझ डालने वाली दलील को भी खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रहने लगा है, तब भी वह पुरानी एसआईआर प्रक्रिया से बाहर नहीं हो जाता. उसका या उसके परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में मौजूद होगा. अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता.

बेंच ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरता है.

केरल: सीएमआरएल मामले में पिनाराई विजयन के घर ईडी की छापेमारी

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गए. ईडी के कई अधिकारियों ने पूर्व सीएम पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित घर पहुंचकर छापेमारी की. यह छापेमारी सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मासिक भुगतान मामले में चल रही जांच के सिलसिले में हुई है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार को दस जगहों पर इस मामले को लेकर छापेमारी की गई. ईडी पहले ही पिनाराई विजयन की बेटी वीणा विजयन का बयान दर्ज कर चुकी है. उनकी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस इस विवाद के केंद्र में है.

दिल्ली के बाद अब तमिलनाडु में 'शराब घोटाले' के आरोप

हालांकि अब तक पिनाराई विजयन से पूछताछ नहीं हुई है लेकिन संकेत हैं कि जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी उनका बयान भी दर्ज कर सकती है. पिनराई विजयन के आवास पर ईडी की छापेमारी को लेकर पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. जबकि विजयन ने अभी तक इस मामले में कोई बयान नहीं दिया है, पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी ने इसे बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के एक प्रमुख नेता को निशाना बनाने की साजिश बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां ना तो विजयन को डराएंगी और ना ही सीपीआई (एम) को कमजोर कर पाएंगी. साथ ही बेबी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केरल की सत्तारूढ़ यूडीएफ सरकार इस कार्रवाई में किसी तरह से शामिल है.

चीन के दौरे पर जर्मन मंत्री ने खुली बातचीत की मांग रखी

जर्मनी की अर्थव्यवस्था मामलों की मंत्री काथरीना राइष बुधवार को चीनके दौरे पर बीजिंग पहुंची हैं. कारोबारी तनाव बढ़ने के बावजूद चीन और जर्मनी आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं. चीन के ताकतवर नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन के उप मंत्री झोउ हाइबिंग से मुलाकात में राइष ने कहा कि जर्मन चांसलर और चीनी राष्ट्रपति के बीच हाल में हुई रचनात्मक चर्चा को जारी रखना जरूरी है. मंत्री स्तरीय यह आयोग चीन में योजना आयोग की भूमिका निभाता है.

राइष ने ध्यान दिलाया कि ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता दोनों देशों के लिए अहम है. इस दौरान उन्होंने मध्य पूर्व के संघर्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से बिजली की बढ़ती मांग की ओर इशारा किया. इस दौरे में राइष चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेनताओ और उप प्रधानमंत्री ही लिफेंग से भी मुलाकात करेंगी जो चीनी सरकार के कारोबार से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालते हैं.

जर्मन मंत्री के साथ कारोबारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी गया है इसमें बीएएसएफ और थिसेनक्रुप जैसी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं. गुरुवार को राइष दक्षिणी औद्योगिक केंद्र गुआंगझू में कंपनियों और स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी.

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इस साल चांसलर मैर्त्स के एशिया दौरे के बाद जर्मनी और चीन आर्थिक चर्चाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि इसी दौर में कारोबार असंतुलन, अनुचित प्रतियोगिता की शिकायतों और यूरोपीय संघ की कठोर रक्षात्मक उपायों की वजह से रिश्तों में तनाव बना हुआ है.

चीन जर्मनी का सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार बना हुआ है, हालांकि जर्मनी का चीन से आयात उसके निर्यात की तुलना में काफी ज्यादा है. जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक दोनों देशों में आपसी कारोबार पिछले साल 250 अरब डॉलर से ज्यादा का हुआ. चीन से आयात जहां 8.8 फीसदी बढ़ कर 170.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया वहीं चीन को निर्यात 9.7 फीसदी गिर कर 81.3 अरब डॉलर पर आ गया.