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Relationship, Sex and Rape: शादी का वादा पूरा न होने पर हर सहमति वाले संबंध को नहीं माना जा सकता 'दुष्कर्म', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक आरोपी की दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने की सजा को रद्द कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी रिश्ते में शुरुआत से ही धोखा देने की दुर्भावना साबित न हो, तो केवल शादी का वादा पूरा न होने या शादी से इनकार करने को 'दुष्कर्म' या 'आत्महत्या के लिए उकसाना' नहीं माना जा सकता.

Relationship, Sex and Rape: शादी का वादा पूरा न होने पर हर सहमति वाले संबंध को नहीं माना जा सकता 'दुष्कर्म', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने सहमति से बने संबंधों (Consensual Relationships) और शादी के वादे से जुड़े मामलों में एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने माना है कि केवल शादी का वादा पूरा न होने (Unfulfilled Promise to Marry) या बाद में शादी से इनकार कर देने मात्र से किसी सहमति वाले रिश्ते को कानूनी रूप से 'दुष्कर्म' (Rape) की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता.

जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की एकल पीठ ने एक आरोपी की दुष्कर्म (आईपीसी की धारा 376) और आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306) की सजा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. अदालत ने पाया कि आरोपी का शुरुआत से ही पीड़ित को धोखा देने का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा (Malicious Intention) रिकॉर्ड पर साबित नहीं होता है. इस ऐतिहासिक फैसले को कानूनी संदर्भ के रूप में 2026 लाइव लॉ (MP) 280 के तौर पर दर्ज किया गया है. यह भी पढ़ें: Violent Sex Case: क्या मैरिटल रेप छूट के बावजूद हिंसक यौन संबंधों के लिए पतियों पर चल सकता है मुकदमा? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

शुरुआत से दुर्भावनापूर्ण इरादा होना जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी शारीरिक संबंध को 'शादी के झूठे वादे के तहत दुष्कर्म' मानने के लिए यह साबित होना अनिवार्य है कि आरोपी का इरादा शुरुआत से ही झूठा वादा करके केवल अपनी हवस मिटाने का था.

अदालत ने कहा:

"रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है जो यह स्थापित कर सके कि आरोपी का शुरुआत से ही मृतका से शादी करने का इरादा नहीं था और वह केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस रिश्ते में आया था। इसके विपरीत, साक्ष्य बताते हैं कि दोनों लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे."

परिजनों को भी थी प्रेम प्रसंग की जानकारी

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने गवाहों के बयानों का गहन विश्लेषण किया. अदालत ने पाया कि मृतका (पीड़िता) के माता-पिता और भाई को दोनों के बीच चल रहे इस प्रेम प्रसंग की पूरी जानकारी थी और उन्होंने इस पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई थी. परिवार की यह मौन सहमति दर्शाती है कि यह रिश्ता पूरी तरह से दोनों वयस्कों की मर्जी और सामाजिक स्वीकार्यता के बीच चल रहा था, न कि किसी धोखे या जबरदस्ती के आधार पर.

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, यह मामला फरवरी 2020 का है, जब पीड़िता के भाई ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. दो दिन बाद लड़की का शव एक खेत में पेड़ से लटका हुआ मिला था.

पुलिस जांच के दौरान आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई. बाद में जब आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया, तो मानसिक तनाव के चलते पीड़िता ने आत्मघाती कदम उठा लिया. निचली अदालत ने इन आरोपों के आधार पर युवक को दोषी करार दिया था, जिसे अब उच्च न्यायालय ने पलट दिया है.

केवल शादी से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं

जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की पीठ ने धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दी गई सजा को खारिज करते हुए कहा कि केवल शादी करने से मना कर देना किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का कानूनी आधार नहीं बन सकता, जब तक कि आरोपी द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां न बनाई गई हों कि पीड़ित के पास कोई दूसरा रास्ता न बचे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक असफल प्रेम संबंध का दुखद अंत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसके लिए कानूनन पुरुष को दुष्कर्म का अपराधी नहीं ठहराया जा सकता.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2026 02:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).