HC on Aadhar and Age: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मोटर दुर्घटना दावों में उम्र का विश्वसनीय प्रमाण नहीं है आधार कार्ड; बीमा कंपनियों के दायित्व पर भी स्थिति साफ
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में दावेदार की सटीक उम्र तय करने के लिए आधार कार्ड को एक पुख्ता या विश्वसनीय दस्तावेज नहीं माना जा सकता. इसके साथ ही कोर्ट ने बीमा कंपनियों के दायित्व (लायबिलिटी) शुरू होने के समय को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है.
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) ने मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों और बीमा पॉलिसी के नियमों को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों को रेखांकित किया है. जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि सड़क दुर्घटना के मामलों में पीड़ितों या उनके आश्रितों को दिए जाने वाले मुआवजे की गणना के लिए आधार कार्ड (Aadhaar Card) उम्र का एक विश्वसनीय प्रमाण नहीं है. इसके साथ ही अदालत ने यह भी व्यवस्था दी है कि केवल इंश्योरेंस प्रीमियम (बीमा किस्त) की राशि प्राप्त कर लेने मात्र से ही बीमा कंपनी पर दावों का दायित्व नहीं थोपा जा सकता, क्योंकि बीमा अनुबंध की शुरुआत पॉलिसी दस्तावेज में उल्लिखित सटीक तारीख और समय से होती है. यह भी पढ़ें: Chhattisgarh: मैरिटल रेप पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला, कहा- पत्नी से जबरन सेक्स अपराध नहीं
आधार कार्ड सिर्फ पहचान का जरिया, जन्मतिथि का अकाट्य प्रमाण नहीं
यह मामला वर्ष 2019 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें टाटा सूमो की टक्कर से दो मोटरसाइकिल सवारों की मौत हो गई थी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था. मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (Claims Tribunal) ने घायल पीड़ित रंजीत भुंजिया के मुआवजे की गणना करते समय उसके आधार कार्ड पर भरोसा किया था, जिसमें उसकी उम्र 68 वर्ष दर्ज थी. उम्र अधिक होने के कारण न्यायाधिकरण ने कम 'मल्टीप्लायर' का उपयोग किया, जिससे पीड़ित का मुआवजा काफी कम हो गया.
उच्च न्यायालय ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीड़ित के क्लेम आवेदन, इलाज के कागजात और विकलांगता प्रमाण पत्र में उसकी उम्र 58 से 60 वर्ष के बीच दर्शाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक नजीर (प्रेसीडेंट) का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड का मुख्य उद्देश्य नागरिक की पहचान स्थापित करना है, न कि उसकी जन्मतिथि को प्रमाणित करना. अदालत ने न्यायाधिकरण के फैसले को त्रुटिपूर्ण मानते हुए पीड़ित की वास्तविक उम्र 61-65 वर्ष के दायरे में तय की और उसका मुआवजा 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3,90,800 रुपये कर दिया.
मोटर दुर्घटना दावों में उम्र का विश्वसनीय प्रमाण नहीं है आधार कार्ड
The Chhattisgarh High Court has held that an #Aadhaar Card is not a reliable document for determining the age of a claimant in motor accident compensation cases.
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— Live Law (@LiveLawIndia) July 15, 2026
प्रीमियम जमा होने से लागू नहीं होता बीमा; पॉलिसी का समय है अंतिम
इस मामले में दूसरा बड़ा विवाद वाहन मालिक और बीमा कंपनी के बीच दायित्व को लेकर था. वाहन मालिक का तर्क था कि उसने दुर्घटना वाले दिन ही शाम 4:00 बजे एक एजेंट के माध्यम से प्रीमियम की राशि जमा कर दी थी और शाम 4:35 बजे वह राशि बीमा कंपनी के खाते में क्रेडिट भी हो गई थी. चूंकि दुर्घटना रात में (प्रीमियम जमा होने के लगभग छह घंटे बाद) हुई थी, इसलिए मालिक का कहना था कि बीमा कंपनी को हर्जाना देना चाहिए, भले ही औपचारिक पॉलिसी अगले दिन जारी हुई हो.
हाई कोर्ट ने वाहन मालिक की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया. अदालत ने पाया कि जिस एजेंट को पैसा दिया गया था, वह कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि नहीं था. अदालत ने फैसला सुनाया:
"बीमा का अनुबंध (Contract of Insurance) केवल उसी तारीख और समय से प्रभावी माना जाएगा जो पॉलिसी दस्तावेज पर दर्ज है, न कि उस तारीख से जब प्रस्ताव दिया गया या प्रीमियम की रसीद जारी की गई. इस मामले में पॉलिसी 20 अप्रैल को रात 12:01 बजे से प्रभावी थी, जबकि हादसा 19 अप्रैल की रात को ही हो चुका था. इसलिए बीमा कंपनी इस नुकसान की भरपाई के लिए उत्तरदायी नहीं है."
तीनों मामलों में मुआवजा राशि में भारी बढ़ोतरी
उच्च न्यायालय ने वाहन मालिक और ड्राइवर की अपीलों को खारिज करते हुए दावेदारों (पीड़ित परिवारों) की क्रॉस-ऑब्जेक्शन याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया और तीनों संबंधित मामलों में मुआवजे की राशि को दोगुने से अधिक बढ़ा दिया:
- घायल रंजीत भुंजिया: मुआवजा 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3,90,800 रुपये किया गया (उनकी विकलांगता का आकलन भी 35% से बढ़ाकर 60% किया गया क्योंकि वे पेशे से बढ़ई थे).
- मृतक बिसानाथ भुंजिया का परिवार: मुआवजा 2,18,200 रुपये से बढ़ाकर 4,26,400 रुपये किया गया.
- मृतक पंचराम भुंजिया का परिवार: मुआवजा 10,73,900 रुपये से बढ़ाकर 21,57,800 रुपये किया गया.
अदालत ने इन सभी बढ़ी हुई राशियों पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है. कोर्ट का यह आदेश भविष्य में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आने वाले दावों में उम्र के निर्धारण और इंश्योरेंस कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शक साबित होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 01:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

