Aadhaar Not Mandatory For Digi Yatra Registration: केरल HC का बड़ा फैसला, डिजी यात्रा रजिस्ट्रेशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं, अन्य सरकारी ID भी मान्य
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: X/@UIDAI)

Aadhaar Not Mandatory For Digi Yatra Registration:  केरल उच्च न्यायालय ने हवाई यात्रियों की सुविधा और डेटा गोपनीयता से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हवाई अड्डों पर त्वरित प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डिजी यात्रा' (Digi Yatra) पर पंजीकरण (Registration) के लिए आधार विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए. अदालत ने माना कि यदि किसी यात्री के पास अपनी पहचान स्थापित करने के लिए कोई अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र मौजूद है, तो उसे केवल आधार न होने की वजह से इस तकनीक के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता.

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की खंडपीठ ने यह टिप्पणी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सीआर नीलकंदन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए की. याचिका में हवाई अड्डों पर यात्रियों के संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए याचिका वापस लेने की इच्छा जताई, लेकिन अदालत ने जनहित का मामला होने के कारण इसे वापस लेने की अनुमति नहीं दी और सुनवाई जारी रखी.

'जब हवाई टिकट के लिए आधार जरूरी नहीं, तो ऐप के लिए क्यों?'

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASGI) ने कोर्ट को बताया कि डिजी यात्रा पूरी तरह से एक स्वैच्छिक सुविधा है और किसी भी यात्री को इसका उपयोग करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है. इस पर पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब कोई आम नागरिक काउंटर से या ऑनलाइन हवाई जहाज का टिकट खरीदता है, तो वहां आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं होती है. ऐसे में केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म या ऐप का उपयोग करने के लिए आधार को ही एकमात्र विकल्प क्यों बनाया जा रहा है?

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का दिया हवाला

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ' (निजता का अधिकार) मामले के फैसले का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि देश की शीर्ष अदालत द्वारा तय किए गए कानून के अनुसार, सरकार हर जगह आधार विवरण के लिए दबाव नहीं डाल सकती है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) हमारा मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास पहचान का कोई दूसरा पुख्ता प्रमाण है, तो डिजी यात्रा पोर्टल तक पहुंच के लिए उसे आधार देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है.

डिजी यात्रा फाउंडेशन से मांगा जवाब

अदालत ने अब इस पूरे मामले में डिजी यात्रा फाउंडेशन को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानना चाहा है. कोर्ट ने पूछा है कि क्या पोर्टल तक पहुंचने के लिए आधार के स्थान पर किसी अन्य सरकारी पहचान पत्र (जैसे पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी) को स्वीकार करने की तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है. मामले की अगली सुनवाई होने तक विभाग को इस पर स्पष्ट निर्देश प्रस्तुत करने को कहा गया है.