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Windfall Tax Hike: वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) बढ़ा दिया है. नई दरें 3 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं.

Windfall Tax Hike: वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits : Unsplash)

नई दिल्ली: मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF/जेट ईंधन) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Profit Tax) में वृद्धि कर दी है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, संशोधित दरें 3 अगस्त 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं.

सरकार का यह निर्णय घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैश्विक कीमतों में अप्रत्याशित उछाल के कारण रिफाइनिंग कंपनियों को होने वाले अत्यधिक मुनाफे (Supernormal Profits) पर कर लगाने के उद्देश्य से लिया गया है. यह भी पढ़ें: E20 पेट्रोल से माइलेज में 2 से 6% की कमी, लेकिन इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं: नितिन गडकरी

पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन पर निर्यात शुल्क की नई दरें

सरकार की पाक्षिक (Fortnightly) समीक्षा के बाद ईंधन निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:

  • पेट्रोल निर्यात: पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹2.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.
  • डीजल निर्यात: डीजल के निर्यात पर कुल कर (जिसमें रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी शामिल है) ₹15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹25.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.
  • एटीएफ (ATF) निर्यात: हवाई ईंधन (जेट फ्यूल) के निर्यात पर शुल्क ₹14.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹22 प्रति लीटर तय किया गया है.

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

निर्णय के पीछे की पृष्ठभूमि और वैश्विक परिस्थितियां

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की दरों और रिफाइनिंग मार्जिन में उतार-चढ़ाव के आधार पर केंद्र सरकार हर दो हफ्ते में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के दाम में काफी अस्थिरता देखी गई है. जब वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल निर्यातक कंपनियां घरेलू आपूर्ति के बजाय विदेशी बाजारों में अधिक दरों पर ईंधन बेचने को प्राथमिकता देने लगती हैं. ऐसे में घरेलू किल्लत को रोकने के लिए सरकार निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू करती है.

विंडफॉल टैक्स की व्यवस्था और इसका उद्देश्य

भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय वैश्विक तेल कीमतों में आए उछाल के दौरान विंडफॉल टैक्स लागू किया था. हालांकि 2024 के अंत में इसे हटा लिया गया था, लेकिन मार्च 2026 से पश्चिम एशिया संकट के गहराने के बाद इसे पुनः लागू कर दिया गया.

इस कर व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखें तथा निजी क्षेत्र की कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर का अनुचित लाभ न उठाएं.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 03, 2026 11:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).