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युद्ध के चलते ईरान में गहराई दवाइयों की किल्लत युद्ध के चलते ईरान में गहराई दवाइयों की किल्लत

अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्धविराम के बीच ईरान में हालात तनावपूर्ण हैं.

युद्ध के चलते ईरान में गहराई दवाइयों की किल्लत युद्ध के चलते ईरान में गहराई दवाइयों की किल्लत
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्धविराम के बीच ईरान में हालात तनावपूर्ण हैं. भुगतान प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है, जिससे दवाइयों का आयात रुक गया है. अब लोगों को आवश्यक दवाइयां मिलना भी मुश्किल हो गया है.ईरान में पहले से ही प्रतिबंधों, मुद्रा की अस्थिरता और बीमा की समस्याओं के कारण इलाज मुश्किल था. अब अमेरिका और इस्राएल के साथ चल रहे युद्ध ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. आपूर्ति मार्ग बाधित हो गए हैं और पहले से नाजुक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.

इसका असर ईरान के लोगों की जिंदगियों पर साफ दिख रहा है, जो कभी किसी दवाई की तलाश में अलग-अलग फार्मेसी के चक्कर लगा रहे हैं, तो कभी डॉक्टर लोगों को महंगी दवाएं छोड़ने पर मजबूर होते देख रहे हैं.

सप्लाई चेन और प्रतिबंध बन रहे मुसीबत

ईरान दवाओं के कच्चे माल के लिए काफी हद तक आयात पर और विदेश में बनी दवाओं पर निर्भर है. जब परिवहन में देरी होती है या खर्च बढ़ता है, तो देश में दवाइयों की कमी हो जाती है और कीमतें भी बढ़ जाती हैं. हालांकि, परिवहन एकमात्र समस्या नहीं है. औपचारिक रूप से दवाइयां प्रतिबंधों से बाहर हैं लेकिन बैंकिंग और भुगतान के प्रतिबंधों के कारण उन्हें खरीदना मुश्किल, धीमा और महंगा हो जाता है.

यह वित्तीय बाधा कई सालों से ईरान के दवा क्षेत्र को प्रभावित करती आ रही है. अब, युद्ध के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है. बढ़ती कीमतें, चरमराती आपूर्ति व्यवस्था, खराब होती बुनियादी संरचना और लोगों की खरीदने की क्षमता में आई गिरावट इस समस्या को और गंभीर कर रही है.

ईरानी अधिकारी स्थिति को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका दावा हैं कि देश के भंडार और घरेलू उत्पादन ने हालात को बखूबी थामा हुआ है. लेकिन मरीजों, डॉक्टरों और उद्योग से जुड़े लोगों की मानें, तो हालात गंभीर हैं. ईरानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता हादी अहमदी ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कमी हो सकती है. जिसमें एल्युमिनियम और पेट्रोकेमिकल सामग्री भी शामिल हैं.

अभी जिन दवाओं का स्टॉक मौजूद भी है, तो उनकी पैकेजिंग और कच्चे माल की कमी के कारण भविष्य में उत्पादन मुश्किल हो सकता है.

इलाज से पीछे हट रहे मरीज

ईरान के क्लीनिकों और फार्मेसियों पर इसका असर साफ दिख रहा है. ईरान में मौजूद कुछ डॉक्टरों का कहना है कि कई दवाएं अब मिल ही नहीं रही हैं या काफी कम ही मिलती हैं और बहुत महंगी हो गई हैं. एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया कि कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि कुछ मरीजों ने तो जरूरी दवाइयां खरीदना भी छोड़ दिया हैं.

उनके एक मरीज ने बताया कि एक फार्मेसी ओस्विक्स नाम की एंटी-प्लेटलेट दवा को ताले में बंद करके रख रही थी. उन्होंने आगे कहा कि जो दवाएं एक समय पर काफी आसानी से उपलब्ध हुआ करती थीं, वो अब भी मिल तो रही हैं लेकिन इतनी महंगी हैं कि लोग उन्हें खरीद नहीं पा रहे हैं.

यह बातें सुनने में कहीं किसी एक इंसान की कहानी जरूर लग सकती हैं लेकिन यह मिलकर एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं. अब यह संकट सिर्फ दुर्लभ दवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम बीमारियों पर भी अब इसका असर दिख रहा है.

इलाज की आस छोड़ चुके लोग

रश्त शहर के एक बुजुर्ग डायबिटीज मरीज के परिजन ने बताया कि अब इंसुलिन केवल सीमित मात्रा में दिया जा रहा है और इसकी कीमत पहले से छह गुना तक बढ़ गई है. एक अन्य मरीज, जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसे रोज दवा लेनी पड़ती है, उसने डीडब्ल्यू को बताया कि उसके पास केवल 18 दिनों की ही दवा बची है, "पिछले छह हफ्तों से मैं उसकी खोज में लगातार फार्मेसियों के चक्कर लगा रहा हूं लेकिन हर जगह बस एक ही जवाब सुनने को मिलता है कि ‘हमारे पास यह दवा नहीं है.'"

इस मरीज का कहना है, "मुझे बस एक दवाई की जरूरत है और उसकी तलाश ने मेरी जिंदगी को परेशानी में डाल दिया है. मैं उन लोगों के हालात के बारे में तो सोच भी नहीं सकता जिन्हें कई तरह की दवाइयों की जरूरत है या जो लोग, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं."

अब कुछ मरीज सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए एक-दूसरे को जानकारी देने लगे हैं कि कौन-सी दवा कहां उपलब्ध है. युद्ध से पहले कुछ परिवार विदेश में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के जरिए अनौपचारिक तरीकों से दवाइयां मंगवा लेते थे. लेकिन अब कड़े नियमों और कमजोर संचार व्यवस्था के कारण यह तरीके भी मुश्किल होते जा रहे हैं.

रिपोर्ट: दानियाल अमीरी

(The above story first appeared on LatestLY on May 28, 2026 11:50 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).