प्रयागराज, 28 जनवरी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 14 साल की किशोरी पर चाकू से हमला करने के आरोपी एवं पीड़िता के चचेरे भाई 15 वर्षीय किशोर को मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है।
किशोर को जमानत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने कहा, जिन परिस्थितियों में और जिस तरीके से अपराध किया गया, वह समाज में अशांति के गंभीर स्तर को दर्शाती है।
हालांकि अदालत ने निचली अदालत में आरोपी किशोर के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने और तीन महीने के भीतर मुकदमें को निस्तारित करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह आदेश 22 जनवरी को पारित किया।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल की उम्र 15 साल से कम है और उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। अधिवक्ता ने जिरह करते हुये कहा कि किशोर न्याय कानून की धारा 12(1) के प्रावधान को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।
यह प्रावधान कहता है कि किशोर को जमानत पर रिहा होने का अधिकार है और केवल अपवाद के मामलों में ही जमानत देने से इनकार किया जा सकता है।
हालांकि राज्य सरकार के वकील ने जमानत का यह कहते हुए विरोध किया कि यदि आरोपी को रिहा किया जाता है तो इससे न्याय की हार होगी।
अदालत ने संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “इस अपराध की परिस्थितियों से पता चलता है कि किशोर ने जो भी कारण हो, अपने चाचा के घर में प्रवेश किया और अपनी चचेरी बहन को छूरा घोंपा। उसने ऐसा तब किया जब उसकी बहन रात के एक बजे घर में सो रही थी। इस हमले के बारे में साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि यह इरादतन हमला था। किशोरी के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर नौ घाव थे।”
उल्लेखनीय है कि मुर्सलीन नाम के एक व्यक्ति द्वारा गाजियाबाद के सिहानी गेट पुलिस थाना में 17 जून, 2019 को भादंवि की धारा 307 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसमें आरोप था कि 16 जून, 2019 को जब मुर्सलीन की बेटी घर में सो रही थी तो रात करीब एक बजे उसका भतीजा घर में घुसा और उसकी बेटी पर चाकू से हमला किया।
– राजेंद्र
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