लखनऊ, तीन जुलाई पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के संगठन 'पसमांदा मुस्लिम समाज' ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अगले लोकसभा चुनाव से पहले इस समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने की ठोस योजना लागू करने की मांग की है।
संगठन ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही योजना को अमली जामा पहनाया जाए ताकि इस समाज में मोदी के वादों के प्रति भरोसा पैदा हो।
पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने यहां एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल तीन जुलाई को हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पसमांदा मुसलमानों की बदहाली पर चिंता जताई थी और उन्हें देश की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि आज एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री ने अभी तक पसमांदा मुसलमानों की बदहाली दूर करने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई है।
उन्होंने कहा कि मोदी अगर सही मायनों में पिछड़े मुसलमानों की बदहाली दूर करने के लिए फिक्रमंद हैं, तो उन्हें ईमानदारी से ठोस कार्ययोजना बनाकर 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू कर देना चाहिए ताकि पसमांदा मुस्लिम समाज में प्रधानमंत्री के वादे को लेकर विश्वास पैदा हो।
मंसूरी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 85 फीसद पसमांदा मुसलमानों की बदहाली को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किये जाने से मुसलमानों के इस वर्ग के उत्थान की कार्ययोजनाओं को और बल मिला है।
अफसोस की बात यह है कि मोदी ने पसमांदा मुसलमानों की समस्याओं के निराकरण की दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं की है।
मंसूरी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत जैसे देश में विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों और जातियों के लोग सदियों से रहते आ रहे हैं और इनके स्वयं के धार्मिक व सामाजिक नियम-कानून हैं, लेकिन ये दूसरे धर्म के नियमों से नहीं टकराते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में यूसीसी लागू करने का क्या औचित्य है।
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