नयी दिल्ली, 21 दिसंबर लोकसभा में कुछ सदस्यों ने बुधवार को सरकार से आग्रह किया कि वह कई समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने से संबंधित विभिन्न राज्यों की मांग पर समग्र रुख अपनाए और प्रदेशों की अनुशंसाओं को शामिल करे।
छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित 12 समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022’ पर सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह पर इन जातियों को एसटी सूची में शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर विधानसभा में एसटी को 32 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले विधेयक को मंजूरी दी गयी, लेकिन यह विधेयक राजभवन में लटका हुआ है।
बैज ने आरोप लगाया कि राजभवन राजनीति का अखाड़ा बन बया है। उन्होंने पूछा, ‘‘आखिर किसके दबाव में राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं?’’
उन्होंने दावा किया कि सरकारी उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है जो आरक्षण खत्म करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में आरक्षण के लिए सरकार को विधेयक लाना चाहिए ताकि एसटी, अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण मिले।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अरुण साव ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आदिवासियों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं, इस समुदाय के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य विद्यालय खोले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहली बार आदिवासी समुदाय की एक महिला राष्ट्रपति बनीं जो इस समाज के लिए सम्मान है।
साव ने कहा कि यह विधेयक लाकर सरकार ने बता दिया कि वह ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ पर काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा आदिवासियों की उपेक्षा की।
द्रमुक के डीएनवी सेंथिल कुमार ने तमिलनाडु के कुछ समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने की मांग की।
तणृमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने कहा कि विभिन्न समुदायों को एसटी सूची में शामिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके कल्याण के लिए कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए ताकि योजनाओं का उचित ढंग से क्रियान्वयन हो सके।
शिवसेना के राजेंद्र गावित ने कहा कि आदिवासियों की जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए।
बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने कहा कि कई समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने के लिए समिति बनाई जाए जिसमें ओडिशा और दूसरे सभी राज्यों की अनुशंसाओं को शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को समग्र रुख अपनाने की जरूरत है।
बहुजन समाज पार्टी के गिरीश चंद्र ने कहा कि सरकार को अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति बहाल करनी चाहिए।
तेलंगाना राष्ट्र समिति के नमा नागेश्वर राव ने कहा कि नयी संसद का नाम भीम राव आंबेडकर के नाम पर रखा जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को विभिन्न राज्यों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए।
जारी हक
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