नयी दिल्ली, 22 जून दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान एक निजी स्कूल को जलाने संबंधी मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति की याचिका सोमवार को खारिज कर दी ।
दंगों के दौरान 24 फरवरी को डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल में तोड़फोड़ और आग लगाने में कथित तौर पर संलिप्तता के लिए शाहरूख मलिक सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी के निवेदन के बाद मलिक को राहत देने से इनकार कर दिया ।
जांच अधिकारी ने अपने निवेदन में कहा कि आरोपी के कॉल रिकॉर्डस से पता चलता है कि घटना के समय वह वहां पर मौजूद था।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मामले में तथ्य और हालात पर विचार करते हुए खासकर दंगे के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति तथा जान के नुकसान को देखते हुए मुझे लगता है कि याचिकाकर्ता जमानत पाने का हकदार नहीं है।’’
अदालत ने कहा कि पुलिस को आपराधिक साजिश या आतंकी वित्तपोषण के बारे में कोई नया सबूत मिलने पर मामले में सह-आरोपी फारूक की जमानत रद्द करने के लिए उपयुक्त कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत द्वारा फारूक को जमानत दिए जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
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