नयी दिल्ली, तीन फरवरी राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में आरोपियों की पहचान करने के संबंध में पुलिस के दो प्रमुख गवाहों की गवाही पर संदेह जताते हुए छह व्यक्तियों को बरी कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला गोकलपुरी पुलिस थाने द्वारा आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये छह आरोपी उस दंगाई भीड़ का हिस्सा थे, जिसने 25 फरवरी 2020 को गोकलपुरी में विभिन्न संपत्तियों और दुकानों में आगजनी की या विस्फोटकों के जरिए उत्पात मचाया था।
अदालत ने 24 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी व्यक्तियों की पहचान स्थापित करने के लिए अभियोजन के दो प्रमुख गवाहों, सहायक उप-निरीक्षक(एएसआई) वनवीर और जहांगीर पर भरोसा किया, लेकिन उनकी गवाही दिसंबर 2020 में हो पाई थी।
अदालत ने कहा, ‘‘एक ही पुलिस थाने में तैनात इन दो पुलिस कर्मियों की गवाही में हुई देरी निश्चित रूप से अभियोजन पक्ष के मामले की सत्यता पर संदेह पैदा करती है। जांच अधिकारी (आईओ) ने इन गवाहों के बयान दर्ज करने में इतनी देरी का कोई कारण नहीं बताया।’’
अदालत ने दोनों पुलिस कर्मियों के इन बयानों पर गौर किया कि वे इलाके के बीट अधिकारी हैं और आरोपी व्यक्तियों को दंगों से पहले से जानते थे।
अदालत ने कहा, ‘‘अगर वे आरोपी व्यक्तियों के नाम जानते थे और दंगाइयों की भीड़ में इन लोगों को देखा था, तो उन्हें किसी वीडियो में आरोपी व्यक्तियों की पहचान करने की कोई जरूरत नहीं थी।’’ हालांकि, उनकी गवाही में, एक वीडियो में आरोपी व्यक्तियों की पहचान करने का उल्लेख था, जिसके बारे में वनवीर ने कहा है कि यह घटना से संबंधित नहीं था।
अदालत ने कहा कि जहांगीर, अदालत में तीन आरोपियों की पहचान नहीं कर सका। उसने कहा, ‘‘मैं अभियोजन पक्ष के गवाह संख्या 16 और 18 के साक्ष्यों पर भरोसा करके यह मान लेना उचित नहीं समझता कि आरोपी उक्त घटनाओं में शामिल रहे थे।’’
अदालत ने छह आरोपियों अर्जुन, गोपाल, धर्मवीर, उमेश, धीरज और मनीष को बरी करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाये गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए।
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