नयी दिल्ली, 12 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में महिला संगठन ‘पिंजरा तोड़’ की एक सदस्य की जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। निचली अदालत ने जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया। विशेष लोक अभियोजक अमित महाजन ने नोटिस स्वीकार किया और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दस दिन का समय मांगा। याचिकाकर्ता (नरवाल) के वकील को इसकी एक प्रति देने के साथ उक्त अवधि के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल किया जाए।’’
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की।
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इस मामले में नरवाल और समूह की एक अन्य सदस्य देवांगना कलिता को इस साल मई में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन पर मामला दर्ज किया था, जिसमें दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराएं शामिल हैं।
उन पर दंगों में "पूर्व-नियोजित साजिश" का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में कड़े आतंकवाद-रोधी कानून- गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
नये नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।
कलिता के खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि नताशा तीन मामलों में आरोपी है।
निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और कलिता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और आरोप-पत्र से यह स्पष्ट है कि जांच अभी लंबित है और इसे अन्य आरोपियों के खिलाफ भी दायर किया गया है।
कलिता ने भी निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है और इस मामले को 14 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
कृष्ण
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