नयी दिल्ली, 23 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली दंगों के दो मामलों में एक व्यक्ति को 15 दिन पहले जमानत देने के बावजूद उसे जेल से रिहा नहीं किए जाने पर मंडोली जेल के अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि जमानत बांड की पुष्टि में विलंब कर उसे ‘‘अनावश्यक रूप से परेशान’’ किया जा रहा है।
अदालत सुहैल के जमानत बांड की स्थिति रिपोर्ट को लेकर दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसे फरवरी में दयालपुर इलाके में दंगों से जुड़े मामले में आठ जुलाई को जमानत दी गई थी।
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मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक ने 22 जुलाई के आदेश में कृष्णा नगर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निर्देश दिया कि सुहैल द्वारा भुगतान किए गए जमानत बांड का तेजी से सत्यापन किया जाए।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान मंडोली जेल के उपाधीक्षक ने अदालत से कहा कि एक मामले में बांड का सत्यापन हो गया है लेकिन संबंधित थाने द्वारा दूसरे मामले में अभी सत्यापन नहीं हुआ है।
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जेल उपाधीक्षक ने सूचित किया कि कृष्णा नगर थाने के एसएचओ को 14 जुलाई और 21 जुलाई को वायरलेस संदेश दिया गया था।
अदालत को बताया गया कि संबंधित थाने के ड्यूटी अधिकारी से जल्द सत्यापन के लिए संपर्क किया गया है।
अदालत ने कहा, ‘‘जेल अधीक्षक ने जमानत बांड को सत्यापन के लिए भेज दिया था। बहरहाल, अभी तक आवेदक (सुहैल) को रिहा नहीं किया गया है और सत्यापन रिपोर्ट के लिए उसे अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।’’
नीरज नीरज नरेश
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