नयी दिल्ली, तीन जुलाई खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की छवि खराब करने के ‘‘दुर्भावना पूर्ण’’ इरादे से कथित तौर पर गलत आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के आरोप में हरियाणा खादी बोर्ड का एक पूर्व असंतुष्ट कर्मचारी दिल्ली पुलिस के शिकंजे में आ गया है।
आरोपी ने केवीआईसी पर हाथी दांत और व्हेल मछली के बने सामान बेचने का आरोप लगाते हुए संस्था के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी।
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आरोपी नरेश कादयान सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध फर्जी शिकायतें दर्ज कराने के लिए खुद को आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता बताता था।
इंद्रप्रस्थ एस्टेट पुलिस थाने में कादयान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में गलत जानकारी प्रदान करने के लिए दिल्ली पुलिस ने उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत मामला दर्ज किया है।
यहां स्थित एक अदालत में दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सौंपी और कहा कि कादयान पर “जानबूझकर और इरादतन” यह तथ्य छुपाने का आरोप है कि केवीआईसी किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित सामान का व्यापार नहीं करता।
पुलिस के अनुसार केवीआईसी ने कादयान द्वारा दायर की गई आरटीआई का जवाब जनवरी 2020 में दिया था लेकिन कादयान ने जांच को गुमराह करने के लिए यह तथ्य पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में छुपाया।
जांच के बाद पुलिस ने अदालत को बताया कि “केवीआईसी न तो हाथी दांत और न ही व्हेल मछली की हड्डियों जैसी प्रतिबंधित चीजों का व्यापार करता है न ऐसी सामग्री उसके पास है।”
पुलिस ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने यह भी बताया कि राजघाट में स्थित केवीआईसी के कार्यालय की तलाशी ली गई थी लेकिन हाथी दांत या व्हेल की हड्डी नहीं मिली।
इस दौरान केवीआईसी का लगातार यह मानना था कि कादयान का इतिहास मलिन रहा है और नियुक्ति के समय से ही वह किसी न किसी विवाद में शामिल रहा है।
केवीआईसी ने पुलिस को बताया कि 1984 में हरियाणा खादी बोर्ड में कादयान ने कथित तौर पर फर्जी डिग्री दिखाकर नौकरी पाई थी और उसे 1986 में नौकरी से निकाल दिया गया था।
हालांकि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश से उसे वापस नौकरी पर रख लिया गया था।
केवीआईसी के अनुसार तभी से कादयान के ऊपर सेवा नियमों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं से लेकर ड्यूटी के दौरान नशा करने के आरोप लगते रहे हैं।
अपने ऊपर लगे आरोपों से शिकंजा कसता देख कादयान ने 2014 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।
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